सीधी: तीन महीने से खौफ का पर्याय बना 11 फीट लंबा मगरमच्छ आखिरकार काबू में, सोन नदी में किया गया रिहा
सीधी जिले के अमरपुर गांव में पिछले तीन महीने से दहशत फैला रहा 11 फीट लंबा नर मगरमच्छ पकड़ा गया है। वन विभाग और घड़ियाल अभयारण्य की संयुक्त टीम ने शनिवार दोपहर करीब 1 बजे रेस्क्यू अभियान चलाकर मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ा।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में स्थित अमरपुर गांव के निवासी पिछले तीन महीनों से एक बड़े खतरे के साये में जी रहे थे। गांव के पास के तालाब में डेरा जमाए बैठे एक 11 फीट लंबे नर मगरमच्छ ने ग्रामीणों की नींद उड़ा रखी थी। शनिवार को वन विभाग और घड़ियाल अभयारण्य की संयुक्त टीम ने एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए इस विशालकाय जीव को सुरक्षित पकड़ लिया है।
लंबे समय से बना था दहशत का कारण
यह मगरमच्छ पिछले कुछ समय से अमरपुर और रोजहा क्षेत्र के आसपास लगातार देखा जा रहा था। यह जीव अक्सर गांव के तालाब में छिपा रहता था, लेकिन कई बार यह रिहायशी इलाकों के काफी करीब तक पहुंच गया था। इसकी मौजूदगी के कारण गांव के बच्चों, बुजुर्गों और मवेशियों के लिए खतरा बढ़ गया था। ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग के कंट्रोल रूम में इसकी सूचना दी थी और इसे पकड़ने की गुहार लगाई थी।
स्थानीय निवासी राकेश सोनी ने बताया कि मगरमच्छ के गांव के करीब होने से हर कोई सहमा हुआ था। जब भी कोई ग्रामीण या बच्चे तालाब के पास जाते थे, तो यह मगरमच्छ उनकी ओर बढ़ने का प्रयास करता था। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस दौरान किसी भी ग्रामीण को कोई शारीरिक नुकसान नहीं पहुंचा। ग्रामीणों के अनुसार, मगरमच्छ ने कुछ मौकों पर छोटे मवेशियों को अपना शिकार जरूर बनाया था, जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश और डर था।
वन विभाग की टीम ने किया सफल रेस्क्यू
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए वन मंडल सीधी और घड़ियाल अभयारण्य की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। मगरमच्छ की पुष्टि होने के बाद शनिवार दोपहर करीब 1 बजे रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। इस चुनौतीपूर्ण कार्य को अंजाम देने वाली टीम में वनपाल पंकज मिश्रा, वनरक्षक जोखी लाल प्रजापति, परशुराम पठारी, दीपक पनिका और तीरथ यादव शामिल थे।
टीम के सदस्यों ने पूरी सावधानी बरतते हुए मगरमच्छ को सुरक्षित जाल में फंसाया। इस दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती गई। वनपाल पंकज मिश्रा ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायतें पूरी तरह सही थीं और मगरमच्छ का आकार काफी बड़ा था, जिसके कारण उसे सुरक्षित पकड़ना प्राथमिकता थी।
प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा गया
सफलतापूर्वक रेस्क्यू करने के बाद वन विभाग की टीम ने मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास यानी सोन नदी में छोड़ने का निर्णय लिया। टीम ने उसे मर्सरहा घाट ले जाकर सुरक्षित तरीके से सोन नदी के गहरे पानी में छोड़ दिया। इस कार्रवाई के बाद अमरपुर और आसपास के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को सलाह दी है कि वे नदी या तालाब के किनारे जाते समय सतर्क रहें। हालांकि मगरमच्छ को पकड़ लिया गया है, लेकिन जल स्रोतों के आसपास सावधानी बरतना हमेशा जरूरी है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में वन विभाग की तत्परता की सराहना की जा रही है।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!