यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत: योगी सरकार ने लॉन्च किया भर्ती निगम, वेतन में 7 हजार तक की बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन में उत्तर प्रदेश आउट सोर्सिंग भर्ती निगम के लोगो का अनावरण किया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित लोक भवन में 'उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम' का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में 7 हजार रुपये तक की वृद्धि की गई है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने निगम के लोगो का अनावरण किया और कई कर्मचारियों को प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे।
शोषण से मुक्ति और पारदर्शी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक आउटसोर्सिंग व्यवस्था तीन अलग-अलग खेमों—कार्मिक, एजेंसी और सरकार—में बंटी हुई थी, जिससे कर्मचारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दर-दर भटकना पड़ता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कोई भी आउटसोर्स कंपनी मनमाने तरीके से किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। यदि किसी को हटाने की आवश्यकता पड़ती है, तो कंपनी को सरकार को ठोस कारण बताना होगा और जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पहले कागजों पर अधिक मानदेय दिखाया जाता था, लेकिन कर्मचारियों को बहुत कम वेतन मिलता था। नई व्यवस्था के तहत अब हर कर्मचारी को उसकी मेहनत के अनुरूप पारिश्रमिक मिलेगा और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का कवर भी प्रदान किया जाएगा। इसमें दुर्घटना की स्थिति में बीमा और भविष्य निधि (PF) की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
नई व्यवस्था की प्रमुख विशेषताएं
इस निगम के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार अनिवार्य किए गए हैं। साथ ही, नियुक्तियों में आरक्षण के नियमों का पालन किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जाति (SC) के लिए 21%, अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 2%, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान है।
कर्मचारियों के लिए अन्य महत्वपूर्ण लाभों में हर महीने की 5 तारीख तक वेतन का भुगतान, 26 दिन का कार्य दिवस, साप्ताहिक अवकाश और महिला कर्मचारियों के लिए मातृत्व अवकाश शामिल हैं। यदि कोई वेंडर समय पर भुगतान नहीं करता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा और बार-बार शिकायत मिलने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
सामाजिक सुरक्षा और बीमा का कवच
सरकार ने सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके परिवार को 15 हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता देने का प्रावधान भी किया है। इसके अलावा, ईपीएफ और ईएसआई की राशि समय पर जमा हो, इसकी निगरानी सीधे निगम द्वारा की जाएगी। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस पहल को कर्मचारियों के लंबे संघर्ष की जीत बताते हुए कहा कि अब उन्हें नौकरी जाने का डर नहीं सताएगा।
निगम के संचालन के लिए सरकार ने 20 करोड़ रुपये की राशि शून्य ब्याज दर पर मंजूर की है। सचिवालय प्रशासन विभाग को इसका नोडल विभाग बनाया गया है। यह व्यवस्था नगरीय निकाय, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और परिवहन जैसे 10 प्रमुख विभागों में कार्यरत लाखों कर्मचारियों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी, जो पहले निजी वेंडर्स के शोषण का शिकार थे।
पूर्व में, आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना, वेतन से अवैध कटौती और बिना नोटिस नौकरी से निकाले जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। अब इस निगम के गठन से इन सभी अनियमितताओं पर रोक लगने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी कर्मचारी आर्थिक भेदभाव का शिकार न हो और उसे सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिले।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!