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उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे धंसा: 7 फीट गहरे गड्ढे को चादर से ढका, निर्माण कार्य पर उठे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के बाद अब उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे धंस गया। प्रयागराज जाने वाली लेन पर करीब 7 फीट गहरा गड्ढा हो गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

2 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
उन्नाव में गंगा एक्सप्रेस-वे धंसा: 7 फीट गहरे गड्ढे को चादर से ढका, निर्माण कार्य पर उठे सवाल
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गंगा एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल

उत्तर प्रदेश में बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की गुणवत्ता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे के बाद अब उन्नाव जिले से गुजरने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे का एक हिस्सा धंस गया है। प्रयागराज की ओर जाने वाली लेन पर करीब 7 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिसने सड़क निर्माण में बरती गई लापरवाही की पोल खोल दी है।

स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि इस बड़े गड्ढे को छिपाने के लिए चादर और शॉल का सहारा लिया गया था। यह दृश्य न केवल हैरान करने वाला है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सुरक्षा मानकों के साथ किस हद तक खिलवाड़ किया जा रहा है। गड्ढे के भीतर बारिश का पानी भरने से यह करीब 2 फीट तक भर गया था, जिससे राहगीरों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया था।

घटना के बाद हरकत में आया प्रशासन

जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, कार्यदायी संस्था आनन-फानन में हरकत में आई। आनन-फानन में गड्ढे को भरने का काम शुरू किया गया। हालांकि, इतनी बड़ी परियोजना के कुछ ही समय बाद सड़क का धंसना निर्माण की मजबूती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई 594 किलोमीटर है। इस परियोजना पर लगभग 36 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि खर्च की गई है। इस एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण इसी साल 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था, जिसके बाद से ही यह राज्य की कनेक्टिविटी का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

परियोजना की पृष्ठभूमि और सुरक्षा चिंताएं

गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्देश्य राज्य के विभिन्न शहरों को आपस में जोड़ना और यात्रा के समय को कम करना है। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही महीनों के भीतर इस तरह की घटनाएं आम जनता के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर रही हैं। सड़क का धंसना और उसे छिपाने के लिए किए गए प्रयास प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेस-वे जैसे संवेदनशील निर्माण में मिट्टी की जांच और जल निकासी की व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि मामूली बारिश में ही सड़क धंस रही है, तो यह स्पष्ट है कि निर्माण सामग्री या तकनीकी डिजाइन में कोई बड़ी खामी रही है। इस मामले में अब तक किसी भी उच्च स्तरीय जांच या जवाबदेही तय करने की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है।

फिलहाल, संबंधित विभाग ने गड्ढे को भर दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मरम्मत स्थायी है या फिर आने वाले समय में फिर से ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। राज्य में एक्सप्रेस-वे के निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी करने वाली एजेंसियों की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है।

इस घटना ने न केवल उन्नाव के निवासियों को बल्कि पूरे प्रदेश के वाहन चालकों को सतर्क कर दिया है। लोग अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि पूरे एक्सप्रेस-वे मार्ग का ऑडिट किया जाए ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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