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उदयपुर नगर निगम में पट्टा वितरण में लापरवाही: चार अफसरों को नोटिस, छुट्टी के दिन भी चला काम

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

3 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
उदयपुर नगर निगम में पट्टा वितरण में लापरवाही: चार अफसरों को नोटिस, छुट्टी के दिन भी चला काम
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पट्टा वितरण में धांधली का खुलासा, हरकत में आया प्रशासन

उदयपुर नगर निगम में पट्टा जारी करने की प्रक्रिया में बरती गई गंभीर लापरवाही के उजागर होने के बाद हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने तत्काल प्रभाव से चार वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। जिन अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, उनमें उपायुक्त नरेश सोनी, नगर नियोजक सिराजुद्दीन, उप नगर नियोजक विजय डामोर और शुचिता कोठारी शामिल हैं।

यह कार्रवाई तब हुई जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उदयपुर दौरे के दौरान निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। खबर सामने आने के बाद, शनिवार और रविवार की छुट्टी होने के बावजूद निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यालय बुलाया गया। पूरे दिन ऑनलाइन पोर्टल पर लंबित रिकॉर्ड को अपडेट करने का काम युद्धस्तर पर चला, जिसे पिछले पांच वर्षों से नजरअंदाज किया जा रहा था।

24 घंटे में 65 पट्टे जारी, फिर भी पेंडेंसी बरकरार

निगम की सक्रियता का असर महज 24 घंटे के भीतर आंकड़ों में देखने को मिला। 31 जुलाई तक जारी पट्टों की संख्या मात्र 19 थी, जो एक दिन बाद बढ़कर 84 हो गई। निगम ने उन ऑफलाइन पट्टों का विवरण ऑनलाइन सिस्टम पर दर्ज किया, जो पहले से जारी किए जा चुके थे। हालांकि, एक दिन में 65 पट्टे जारी करने का दावा करने के बावजूद, निगम की कुल प्रगति अभी भी संतोषजनक नहीं है।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्राप्त आवेदनों का 97.69% हिस्सा अभी भी लंबित है। केवल 2.31% आवेदनों का ही निस्तारण हो पाया है। पोर्टल पर अभी भी हजारों फाइलें या तो आवेदकों के अधूरे दस्तावेजों के कारण या फिर निगम के स्तर पर बेवजह रोके जाने के कारण अटकी हुई हैं।

फाइलों को धूल से बाहर निकाला, मौका सर्वे शुरू

निगम की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहरी सेवा शिविरों में आए 863 आवेदनों में से अधिकांश फाइलें लाल कपड़ों में बांधकर अलमारियों में डाल दी गई थीं। खबर प्रकाशित होने के बाद, इन फाइलों को दोबारा निकाला गया और आवेदकों के घर जाकर मौका रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू किया गया। निगम प्रशासन अब इन मामलों में आपत्तियां आमंत्रित कर पट्टा जारी करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का दावा कर रहा है।

पूर्व में सामने आया था कि साल 2021 से 3,673 पट्टों की फाइलें बिना किसी ठोस कारण के अटकी हुई थीं। कई फाइलों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर और 'पट्टा जारी' जैसे रिमार्क होने के बावजूद, वे जोनल डीसी और बाबू स्तर पर धूल फांक रही थीं। इस प्रशासनिक सुस्ती ने न केवल आवेदकों को परेशान किया, बल्कि निगम की कार्यक्षमता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

आगे की राह और जवाबदेही

फिलहाल, निगम प्रशासन ने पोर्टल पर रिकॉर्ड सुधारने का काम तेज कर दिया है, लेकिन लंबित फाइलों का अंबार अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। नोटिस पाने वाले अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इतने लंबे समय तक फाइलों को जानबूझकर क्यों अटकाया गया था। शहरवासियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कार्रवाई केवल दिखावा है या वास्तव में निगम की कार्यप्रणाली में कोई स्थायी सुधार आएगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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