सुपौल: भारत-नेपाल सीमा पर प्रशासन की कड़ी निगरानी, 5 किलोमीटर पैदल चलकर लिया सुरक्षा का जायजा
सुपौल में भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और सीमा से सटे गांवों के विकास को लेकर गुरुवार शाम प्रशासनिक अधिकारियों ने करीब 5 किलोमीटर तक पैदल सीमा क्षेत्र का निरीक्षण किया। डीएम सावन कुमार ने एसपी सरथ आरएस, अनुमंडल प्रशासन और एसएसबी अधिकारियों के साथ वीरपुर वार्ड नंबर-1 के नो मेंस लैंड से सटे सरवरिया टोला से मुंशी पिपराही बीओपी तक पैदल चलकर सीमा क्षेत्र का जायजा लिया।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

बिहार के सुपौल जिले में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के उद्देश्य से प्रशासनिक अधिकारियों ने एक विशेष अभियान चलाया। गुरुवार की शाम जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों का पैदल दौरा किया। इस दौरान अधिकारियों ने करीब 5 किलोमीटर के दायरे में नो मेंस लैंड और उससे सटे इलाकों की जमीनी हकीकत को परखा।
नो मेंस लैंड से मुंशी पिपराही बीओपी तक निरीक्षण
जिलाधिकारी सावन कुमार और पुलिस अधीक्षक सरथ आरएस ने संयुक्त रूप से इस निरीक्षण का नेतृत्व किया। उनके साथ अनुमंडल प्रशासन के अधिकारी और सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवान भी मौजूद थे। अधिकारियों की टीम ने वीरपुर वार्ड नंबर-1 के पास स्थित नो मेंस लैंड से लेकर सरवरिया टोला और मुंशी पिपराही बीओपी तक पैदल यात्रा की। इस दौरान उन्होंने सीमा स्तंभों की स्थिति और सीमावर्ती गांवों की भौगोलिक परिस्थितियों का बारीकी से अवलोकन किया।
यह निरीक्षण 'वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम' के तहत आयोजित किया गया था। बसंतपुर प्रखंड के अंतर्गत चयनित 27 राजस्व ग्रामों में विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता देना इस दौरे का मुख्य लक्ष्य था। अधिकारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिक्रमण न हो सके।
तस्करी और अवैध गतिविधियों पर नकेल की तैयारी
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी सावन कुमार ने स्पष्ट किया कि सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों, शराब और हथियारों की तस्करी को रोकने के लिए सीमा पर गश्त बढ़ा दी गई है। नो मेंस लैंड के आसपास किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा सुरक्षा केवल बाड़ या गश्त तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय निवासियों के साथ बेहतर समन्वय भी जरूरी है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत सुरक्षा बलों या नजदीकी पुलिस थाने को दें ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर जोर
जिलाधिकारी ने सुरक्षा बलों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय को और बेहतर बनाएं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में किसी भी तरह का अवैध स्ट्रक्चर खड़ा करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती हो सकता है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित एजेंसियों को तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान वीरपुर के अनुमंडल पदाधिकारी विनय कुमार, एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार, बीडीओ सुजीत कुमार मिश्रा और सीओ ब्रजेश कुमार सिंह सहित एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारी और जवान उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सक्रियता से सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के प्रति एक कड़ा संदेश गया है।
आने वाले समय में सीमावर्ती गांवों में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ सुरक्षा निगरानी को और अधिक तकनीकी रूप से मजबूत करने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि सीमा की सुरक्षा और गांवों का विकास एक-दूसरे के पूरक हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और समृद्धि बनी रहेगी।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!