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मूंग खरीदी पर सपा का सरकार पर तंज: कहा- किसान की फसल पूरी नहीं खरीदी तो नेताओं का वेतन 40% काटा जाए

समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश ने एमपी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए एक अनोखी मांग की है। सपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार किसानों की पूरी मूंग की फसल खरीदने को तैयार नहीं है और MSP पर महज 60% खरीदी का झुनझुना थमा रही है, तो फिर प्रदेश के विधायक, सांसद और मंत्री भी पूरा वेतन क्यों ले रहे हैं?

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
मूंग खरीदी पर सपा का सरकार पर तंज: कहा- किसान की फसल पूरी नहीं खरीदी तो नेताओं का वेतन 40% काटा जाए
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मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर समाजवादी पार्टी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. मनोज यादव ने राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक अनोखी मांग रखी है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की पूरी मूंग की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने में असमर्थ है, तो फिर प्रदेश के विधायक, सांसद और मंत्रियों को भी पूरा वेतन लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

दोहरे मापदंड पर सवाल

सपा प्रदेशाध्यक्ष ने तर्क दिया कि किसान ढाई महीने तक कड़ी मेहनत कर अपनी फसल तैयार करता है, लेकिन सरकार उसकी उपज का केवल 60% हिस्सा ही खरीदने का दावा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को अपनी शेष फसल खुले बाजार में औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर कर रही है। डॉ. यादव ने दो टूक कहा कि जब किसान को उसकी उपज का पूरा दाम नहीं मिल रहा, तो जनप्रतिनिधियों को जनता के टैक्स से मिलने वाला पूरा वेतन नहीं लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि यदि खरीदी पूरी नहीं होती है, तो नेताओं के वेतन में 40% की कटौती की जानी चाहिए।

पार्टी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर भी निशाना साधा। सपा का कहना है कि केंद्रीय मंत्री का गृह राज्य होने के बावजूद प्रदेश के किसान अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। नर्मदापुरम से भोपाल तक किसानों का पैदल मार्च इस बात का प्रमाण है कि 'डबल इंजन' सरकार की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। सरकार ने दबाव में आकर मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% तो की है, लेकिन यह किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है।

खाद संकट और चावल घोटाले का आरोप

प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में व्याप्त अन्य गंभीर मुद्दों को भी उठाया। पार्टी ने आरोप लगाया कि खाद वितरण की ई-टोकन प्रणाली पूरी तरह विफल साबित हुई है। किसान खाद के लिए 100 से 150 किलोमीटर दूर भटक रहे हैं, जबकि खुले बाजार में खाद की भारी कालाबाजारी हो रही है। सपा ने मांग की कि खाद वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए और कालाबाजारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, सपा ने बालाघाट सहित 17 जिलों में कुपोषित बच्चों के लिए आरक्षित 1160 करोड़ रुपये के फोर्टिफाइड चावल को एथेनॉल बनाने के नाम पर निजी मिलों को बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी ने इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही, केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे छतरपुर और पन्ना के 24 गांवों के 7,193 परिवारों के लिए 25 लाख रुपये का मुआवजा और 3 एकड़ जमीन देने की पुरजोर वकालत की है।

सपा की प्रमुख मांगें और भविष्य की रणनीति

समाजवादी पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक किसानों को उनकी उपज का पूरा हक नहीं मिल जाता। पार्टी की प्रमुख मांगों में 10,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 100% मूंग की खरीदी, खाद की कालाबाजारी पर रोक, चावल घोटाले की न्यायिक जांच और केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों को उचित पुनर्वास पैकेज देना शामिल है।

डॉ. मनोज यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रदेश के किसानों, आदिवासियों और शोषित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करने के लिए तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपनी किसान विरोधी नीतियों में सुधार नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

फिलहाल, सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सपा के इस आक्रामक रुख ने प्रदेश की राजनीति में मूंग खरीदी के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है। किसान संगठनों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार खरीदी की सीमा को 100% तक बढ़ाती है या फिर यह गतिरोध और लंबा खिंचेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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