अनशन की पवित्रता पर सवाल उठाने वालों पर सोनम वांगचुक का पलटवार, कहा- क्या मुझे किसी से प्रमाण पत्र चाहिए
सोनम वांगचुक ने शुक्रवार रात 10:53 बजे एक और वीडियो मैसेज जारी किया है। उन्होंने कहा- 26 दिन भूखा रहने के बाद 11 किलो वजन कम हो गया है, क्या मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

अनशन की शुचिता पर उठे सवालों का वांगचुक ने दिया जवाब
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपने हालिया अनशन को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार देर रात जारी किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने उन लोगों को आड़े हाथों लिया जो उनके अनशन के समापन और केंद्रीय मंत्रियों की भूमिका पर संदेह जता रहे थे। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि 26 दिनों तक चले इस कठिन उपवास के दौरान उन्होंने अपने स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता की सीमाओं को चुनौती दी है।
वांगचुक ने बताया कि इस लंबे उपवास के कारण उनका वजन 11 किलोग्राम तक कम हो गया है। उन्होंने भावुक होते हुए पूछा कि क्या उन्हें अब किसी से अपने अनशन की पवित्रता का प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता है। उन्होंने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें किसी प्रकार की 'डील' या गुप्त समझौते की बात कही जा रही थी।
क्या किसी समझौते के तहत तोड़ा गया अनशन?
सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर उठ रहे सवालों का जिक्र करते हुए वांगचुक ने कहा कि उन्हें कई लोगों ने बताया है कि लोग यह पूछ रहे हैं कि उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों के हाथों अनशन क्यों तोड़ा। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उन्हें कोई समझौता या डील करनी होती, तो वे 26 दिनों तक भूखे रहकर अपना जीवन जोखिम में क्यों डालते। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनशन का उद्देश्य लद्दाख के हितों की रक्षा करना था, न कि किसी राजनीतिक लाभ के लिए सौदेबाजी करना।
उन्होंने कहा कि अनशन के दौरान शरीर पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 26 दिनों की भूख हड़ताल एक अत्यंत कठिन प्रक्रिया है, और इसे किसी भी प्रकार की 'डील' के लिए करना तर्कहीन है। वांगचुक ने अपने आलोचकों से आग्रह किया कि वे अनशन के मूल उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करें, न कि उन पर व्यक्तिगत हमले करें।
आलोचकों के लिए वांगचुक का कड़ा संदेश
वांगचुक ने अपने वीडियो संदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से भी अपने चरित्र या अपने संघर्ष की शुचिता का सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष लद्दाख के लोगों की मांगों और उनके भविष्य के लिए है। उन्होंने उन लोगों की मंशा पर सवाल उठाया जो उनके संघर्ष को कमजोर करने के लिए भ्रामक बातें फैला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लद्दाख के मुद्दों को लेकर वे हमेशा से मुखर रहे हैं और आगे भी रहेंगे। किसी भी प्रकार की नकारात्मक टिप्पणी या निराधार आरोप उनके संकल्प को डिगा नहीं सकते। वांगचुक ने अपने समर्थकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और लद्दाख के विकास के लिए एकजुट रहें।
संघर्ष का भविष्य और आगे की राह
सोनम वांगचुक का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लद्दाख की मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत का दौर चल रहा है। उनके अनशन ने न केवल लद्दाख के स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनाया, बल्कि सरकार को भी इन मांगों पर विचार करने के लिए मजबूर किया है।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे और लद्दाख के अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे, चाहे उन पर कितने भी सवाल क्यों न उठाए जाएं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
