सिंगरौली: सड़क न होने से प्रसूता को 2 किलोमीटर पैदल ले जाने को मजबूर हुए परिजन
सिंगरौली जिले के चितरंगी जनपद की ग्राम पंचायत बरहट के भटवा टोला में सड़क सुविधा के अभाव के कारण ग्रामीणों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रसव के बाद एक महिला को अस्पताल से घर ले जाने के लिए परिजनों को लगभग दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सड़क के अभाव में ग्रामीणों की दुश्वारियां
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में बुनियादी सुविधाओं के अभाव की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। चितरंगी जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरहट के भटवा टोला में सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में प्रसव के बाद अस्पताल से घर लौट रही एक महिला को उसके परिजनों ने करीब दो किलोमीटर तक पैदल चलकर घर पहुंचाया, क्योंकि गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता उपलब्ध नहीं है।
पीड़ित महिला महिमा द्विवेदी, जिनके पति सोमेश्वर द्विवेदी हैं, को डिलीवरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। घर पहुंचने के दौरान उन्हें और उनके परिजनों को दुर्गम रास्तों और कीचड़ भरी पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ा। बरसात के मौसम में यह रास्ता और भी अधिक खतरनाक हो जाता है, जिससे मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए आवागमन करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
दो हजार की आबादी जोखिम में
भटवा टोला की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां करीब दो हजार की आबादी निवास करती है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह टूट जाता है। इस दौरान बीमार व्यक्तियों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को भी इसी तरह जोखिम उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। कई बार आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों से गुहार लगाई है। सड़क निर्माण की मांग को लेकर दिए गए आवेदनों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
इस मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद चितरंगी जनपद पंचायत के सीईओ मानसिंह सैयाम ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और वे स्वयं स्थिति का जायजा लेने के लिए गांव का दौरा करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मौके पर पहुंचकर वस्तुस्थिति की जांच की जाएगी और समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय प्रशासन की ओर से अब इस मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें उम्मीद है कि इस बार प्रशासन सड़क निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता देगा ताकि उन्हें हर साल बरसात के मौसम में ऐसी दयनीय स्थिति का सामना न करना पड़े।
यह घटना न केवल भटवा टोला की बल्कि जिले के कई सुदूरवर्ती इलाकों की बदहाल स्थिति को दर्शाती है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण आज भी मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की ओर से किए गए वादे कब तक धरातल पर उतरते हैं और ग्रामीणों को कब तक पक्की सड़क की सुविधा मिल पाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!