ब्रेकिंग
करनाल फायरिंग मामला: पुरानी रंजिश में हुई वारदात का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तारबालसमंद के राजकीय कॉलेज को मिला अपना भवन, 11 करोड़ से अधिक की राशि मंजूरमधुबनी: एनएच-27 पर उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 528 लीटर विदेशी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तारऔरंगाबाद: सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराने का वीडियो वायरल, पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोपअलवर में लेपर्ड की दस्तक: रिहायशी इलाकों में घूमता दिखा तेंदुआ, लोगों में दहशतअजमेर में ज्वेलरी शोरूम के बाहर महिला से चेन लूट, भीड़ ने एक बदमाश को दबोचकर की धुनाईश्रावस्ती: 10 माह की मासूम से दरिंदगी, रिश्ते के किशोर पर दुष्कर्म का आरोपकानपुर देहात: मासूम हत्याकांड की जांच से लौट रहे एएसपी की कार बंबे में गिरी, बाल-बाल बची जान
करनाल फायरिंग मामला: पुरानी रंजिश में हुई वारदात का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तारबालसमंद के राजकीय कॉलेज को मिला अपना भवन, 11 करोड़ से अधिक की राशि मंजूरमधुबनी: एनएच-27 पर उत्पाद विभाग की बड़ी कार्रवाई, 528 लीटर विदेशी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तारऔरंगाबाद: सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराने का वीडियो वायरल, पहले भी लग चुके हैं गंभीर आरोपअलवर में लेपर्ड की दस्तक: रिहायशी इलाकों में घूमता दिखा तेंदुआ, लोगों में दहशतअजमेर में ज्वेलरी शोरूम के बाहर महिला से चेन लूट, भीड़ ने एक बदमाश को दबोचकर की धुनाईश्रावस्ती: 10 माह की मासूम से दरिंदगी, रिश्ते के किशोर पर दुष्कर्म का आरोपकानपुर देहात: मासूम हत्याकांड की जांच से लौट रहे एएसपी की कार बंबे में गिरी, बाल-बाल बची जान

शाजापुर: निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, 8 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

Shajapur private school association protest CM Mohan Yadav memorandum demand updates. शाजापुर में मध्यप्रदेश प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ ने मंगलवार दोपहर निजी विद्यालयों की विभिन्न समस्याओं को लेकर प्रदर्शन किया। संघ ने शाजापुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गृह मंत्रालय के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें 732
शाजापुर: निजी स्कूल संचालकों का प्रदर्शन, 8 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
click here

शाजापुर में मंगलवार को निजी स्कूल संचालकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। मध्यप्रदेश प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ के बैनर तले एकत्रित हुए स्कूल संचालकों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और गृह मंत्रालय को एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे आगामी समय में उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

आरटीई फीस प्रतिपूर्ति और मान्यता पर जोर

संघ के जिला अध्यक्ष दिलीप शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत लंबित फीस प्रतिपूर्ति का मुद्दा उठाया गया। संचालकों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से आरटीई के तहत पढ़ाई करने वाले छात्रों की फीस का भुगतान नहीं किया गया है, जिससे निजी स्कूलों का आर्थिक ढांचा चरमरा गया है। इसके अलावा, कक्षा पहली से 12वीं तक के विद्यालयों को स्थायी मान्यता प्रदान करने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई है।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि राज्य शिक्षा सलाहकार परिषद का गठन किया जाए, जिसमें अशासकीय शिक्षण संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। संचालकों का तर्क है कि नीतिगत निर्णयों में उनकी भागीदारी होने से जमीनी स्तर की समस्याओं का बेहतर समाधान निकल सकेगा।

सुरक्षा कानून और शैक्षणिक कैलेंडर की मांग

निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षकों और प्राचार्यों की सुरक्षा के लिए एक विशेष 'प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग की है। संघ का कहना है कि जिस तरह डॉक्टरों और अस्पताल के कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कानून प्रभावी हैं, उसी तर्ज पर स्कूलों में काम करने वाले स्टाफ को भी सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, हर वर्ष शैक्षणिक कैलेंडर को जून माह से लागू करने और स्कूलों पर विभिन्न प्रकार की आईडी बनाने के अनावश्यक दबाव को समाप्त करने की बात कही गई है।

प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी संघ ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मांग की है कि बिना स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) के किसी भी छात्र को दूसरे विद्यालय में प्रवेश न दिया जाए। संचालकों का मानना है कि वर्तमान में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान जल्दबाजी में लिए जा रहे निर्णय शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

जिला अध्यक्ष दिलीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन केवल एक शुरुआत है। यदि शासन स्तर पर उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो संघ पहले चरण में प्रदेशव्यापी 'कलमबंद हड़ताल' करेगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसमें एक दिवसीय सांकेतिक रूप से निजी विद्यालयों को पूरी तरह बंद रखने का निर्णय भी शामिल है।

संघ ने साफ कर दिया है कि भविष्य में होने वाले किसी भी प्रकार के आंदोलन या उससे उत्पन्न होने वाली स्थितियों के लिए पूरी तरह से शासन प्रशासन जिम्मेदार होगा। निजी स्कूल संचालकों के इस प्रदर्शन ने शिक्षा विभाग के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, क्योंकि आरटीई भुगतान और मान्यता जैसे मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।

SponsoredVertex Media Studios advertisement

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें