शाजापुर: 'धरती आबा योजना' में 36 लाख की धोखाधड़ी, चार लोगों पर FIR दर्ज
Shajapur Dharti Aaba Yojana fraud case court orders FIR against officials. शाजापुर जिले में आदिवासी हितग्राहियों के लिए संचालित धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में करोड़ों की योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष न्यायालय के आदेश के बाद अजाक थाना पुलिस ने सोमवार रात चार नामजद आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले में 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' के तहत एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। आदिवासी हितग्राहियों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई है। विशेष न्यायालय के सख्त आदेश के बाद अजाक थाना पुलिस ने मामले में चार नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला ग्राम शादीपुरा के दो आदिवासी युवकों, रोहित भिलाला और विकास भिलाला से संबंधित है। दोनों युवकों को मत्स्य विभाग की 90 प्रतिशत अनुदान वाली योजना के तहत 18-18 लाख रुपये मूल्य के इन्सुलेटेड मछली परिवहन वाहन दिलाने का प्रलोभन दिया गया था। आरोप है कि अनिल चन्द्रपाल, सीताराम चन्द्रपाल, इन्द्रसिंह गुर्जर और राठी मोटर्स के संचालक निलेश राठी ने मिलकर इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।
पीड़ितों का आरोप है कि आरोपियों ने खुद को विभाग से जुड़ा बताकर उनके दस्तावेज लिए और बैंक ऑफ बड़ौदा में खाते खुलवाए। इसके बाद, आरोपियों ने उनसे छह-छह कोरे चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए। 10 मार्च 2026 को जब सरकार की ओर से 18-18 लाख रुपये की अनुदान राशि दोनों के खातों में आई, तो अगले ही दिन आरोपियों ने कोरे चेकों का दुरुपयोग कर पूरी राशि अपने निजी खातों में स्थानांतरित कर ली।
महंगे वाहन के बदले थमा दी साधारण बोलेरो
धोखाधड़ी का सिलसिला यहीं नहीं रुका। सरकारी अनुदान की पूरी राशि हड़पने के बाद, आरोपियों ने हितग्राहियों को 18 लाख रुपये के इन्सुलेटेड वाहन के स्थान पर मात्र 8-8 लाख रुपये की साधारण लोडिंग बोलेरो थमा दी। वह भी बिना बॉडी के। वाहन को उपयोग के लायक बनाने के लिए दोनों भाइयों को बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर अलग से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये खर्च करने पड़े।
पीड़ितों को इस ठगी का पता तब चला जब उन्हें जनपद पंचायत और मत्स्य विभाग से आधिकारिक पत्र प्राप्त हुए। इन पत्रों से स्पष्ट हुआ कि शासन ने उनके नाम पर इन्सुलेटेड वाहन स्वीकृत किए थे, जबकि उन्हें बहुत कम कीमत के साधारण वाहन दिए गए थे। कलेक्टर और एसपी कार्यालय में शिकायत करने के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ितों ने विशेष न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायालय के आदेश पर पुलिस की कार्रवाई
विशेष न्यायाधीश अंजनी नंदन जोशी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 जुलाई को पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। न्यायालय के आदेश के बाद अजाक थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वर्तमान में चार आरोपियों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन जांच का दायरा आगे बढ़ेगा।
अजाक थाना प्रभारी रामचंद्र नागर ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है। जांच के दौरान यदि मत्स्य विभाग या बैंक के किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा। यह घोटाला न केवल सरकारी धन के गबन का है, बल्कि आदिवासी हितग्राहियों के साथ विश्वासघात का भी है, जिस पर अब प्रशासन की पैनी नजर है।
फिलहाल, पुलिस सभी साक्ष्यों को जुटाने में लगी है ताकि आरोपियों को सजा दिलाई जा सके। इस घटना ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बिचौलियों की भूमिका और विभागीय लापरवाही पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
