संसद में संजय सिंह का बड़ा दावा: RSS पर तिरंगा न फहराने और राष्ट्रगान के विरोध का आरोप
नई दिल्ली: संसद में वंदे मातरम विधेयक पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखे हमले बोले। सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने सदन में कहा कि वंदे मातरम, राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का अपमान नहीं होना चाहिए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

संसद में वंदे मातरम विधेयक पर चर्चा के दौरान तीखी बहस
नई दिल्ली में संसद के भीतर उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की कार्यप्रणाली और इतिहास पर गंभीर सवाल उठाए। 'वंदे मातरम विधेयक' पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने दावा किया कि देश की आजादी के बाद लंबे समय तक संघ ने तिरंगे को लेकर जो रुख अपनाया, वह राष्ट्रवाद के दावों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
संजय सिंह ने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और वंदे मातरम का सम्मान सर्वोपरि है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों को आज देशभक्ति का प्रमाण पत्र बांटने की आदत है, उनके संगठन ने दशकों तक तिरंगे को स्वीकार नहीं किया था। हंगामे के कारण सांसद सदन में अपनी पूरी बात नहीं रख सके, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दावे सार्वजनिक किए।
दस्तावेजों के जरिए उठाए सवाल
सांसद संजय सिंह ने अपने दावों की पुष्टि के लिए दो ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला दिया। उन्होंने 21 जनवरी 1930 के एक कथित पत्र का जिक्र किया, जिसे उन्होंने डॉ. हेडगेवार द्वारा स्वयंसेवकों को लिखा हुआ बताया। सिंह का दावा है कि इस पत्र में निर्देश दिए गए थे कि कांग्रेस द्वारा तिरंगा फहराने के आह्वान के विपरीत, संघ की शाखाओं में केवल भगवा ध्वज ही फहराया जाए।
इसके अलावा, उन्होंने 28 दिसंबर 1949 के 'ऑर्गेनाइजर' पत्रिका के एक अंक का उल्लेख किया। संजय सिंह के अनुसार, इस अंक में 'जन गण मन' को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं और इसे मनोरंजन का साधन करार दिया गया था। उन्होंने तर्क दिया कि ये दस्तावेज संघ के वैचारिक इतिहास की सच्चाई को दर्शाते हैं।
आजादी के आंदोलन और मुखबिरी के आरोप
संजय सिंह ने आगे आरोप लगाया कि संघ ने आजादी के संघर्ष के दौरान क्रांतिकारियों के खिलाफ अंग्रेजों का साथ दिया था। उन्होंने दावा किया कि संघ के पूर्वजों ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय मुखबिरी की थी। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक तथ्यों को जनता के सामने लाना आवश्यक है ताकि देश को यह पता चल सके कि कौन वास्तव में राष्ट्र के प्रति समर्पित रहा है।
सांसद ने कहा कि वे इन दस्तावेजों को सार्वजनिक कर रहे हैं ताकि लोग स्वयं सच्चाई का आकलन कर सकें। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन दस्तावेजों को साझा करते हुए लोगों से इन्हें व्यापक रूप से प्रसारित करने की अपील की है, ताकि इस बहस को और अधिक स्पष्टता मिल सके।
सदन में भारी हंगामा और विरोध
संजय सिंह द्वारा उठाए गए इन मुद्दों के बाद संसद में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। भाजपा और संघ से जुड़े सदस्यों ने इन आरोपों का कड़ा विरोध किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और सांसद संजय सिंह को अपनी बात पूरी करने से रोक दिया गया। सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में वैचारिक मतभेदों को सतह पर ला दिया है। जहां एक ओर विपक्ष ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष इसे राष्ट्रवाद के नाम पर भ्रामक प्रचार बता रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!