सहरसा के DPO अजीत अमर के ठिकानों पर EOU का छापा, आय से अधिक संपत्ति का मामला
Saharsa DPO Ajit Amar EOU raid disproportionate assets case updates. आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी अजीत अमर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। EOU ने शुक्रवार सुबह अजीत अमर के चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

सहरसा के DPO के चार ठिकानों पर EOU की दबिश
बिहार में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने सहरसा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) अजीत अमर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। शुक्रवार की सुबह EOU की टीमों ने एक साथ उनके चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों के बाद की गई है। जांच एजेंसी की टीमें सीवान, सहरसा और छपरा में तैनात की गई थीं, जहां अधिकारी के निजी और सरकारी आवासों की तलाशी ली गई।
EOU की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि अजीत अमर ने अपनी वैध आय से 62 लाख 20 हजार 550 रुपए से अधिक की संपत्ति जुटाई है। यह राशि उनकी ज्ञात आय के मुकाबले लगभग 72.35 प्रतिशत अधिक है। छापेमारी के दौरान सीवान के रैनी गांव स्थित उनके पैतृक आवास, सहरसा के नया बाजार स्थित किराए के मकान और कार्यालय, तथा छपरा की गंडक कॉलोनी में स्थित सरकारी आवास को खंगाला गया।
छपरा पोस्टिंग के दौरान सामने आए थे गंभीर वित्तीय अनियमितता के संकेत
अजीत अमर का तबादला करीब छह महीने पहले ही छपरा से सहरसा हुआ था। छपरा में तैनाती के दौरान उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे। जांच में पाया गया कि उनकी 32 महीने की सेवा अवधि के दौरान उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में कुल 2 करोड़ 51 लाख 6 हजार 562 रुपए का लेन-देन हुआ था, जबकि उनकी कुल वेतन आय मात्र 27 लाख 43 हजार 40 रुपए थी। इन संदिग्ध लेनदेन के बाद ही उन्हें सहरसा स्थानांतरित किया गया था ताकि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी हो सके।
जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, DPO ने अपनी पत्नी पूजा कुमारी के नाम पर एकमा प्रखंड में करीब 6 बीघा से अधिक जमीन 41.50 लाख रुपए में खरीदी थी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने करोड़ों की लागत से एक आलीशान घर भी बनवाया है। समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के बैंक खातों की भी गहन जांच की जानी चाहिए, क्योंकि वास्तविक अवैध आय का आंकड़ा 3 करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है।
रिश्वतखोरी और वेंडर कार्य दिलाने के नाम पर वसूली का आरोप
DPO के खिलाफ यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद तेज हुई, जिसमें उन पर शिक्षा विभाग में वेंडर का काम दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता रवि कुमार राम ने आरोप लगाया था कि अजीत अमर ने उनसे 12.50 लाख रुपए की मांग की थी। शिकायत के अनुसार, इसमें से 10.70 लाख रुपए नकद और 1 लाख 3 हजार 480 रुपए डिजिटल माध्यम से उनके रिश्तेदारों के खातों में भेजे गए थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि काम न मिलने पर जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो DPO ने उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की धमकी दी। बाद में केवल एक छोटी राशि वापस की गई, जबकि शेष 10 लाख 79 हजार 680 रुपए का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले के जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग तक पहुंचने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप EOU ने अब औपचारिक छापेमारी की है।
EOU की छापेमारी के दौरान सीवान में उनके पैतृक घर पर ताला बंद होने के कारण टीम को इंतजार करना पड़ा, जबकि सहरसा और छपरा में स्थानीय पुलिस की मदद से तलाशी अभियान चलाया गया। सहरसा स्थित कार्यालय में भी टीम ने कर्मचारियों से पूछताछ की है। फिलहाल, जब्त दस्तावेजों और बैंक खातों की विस्तृत जांच की जा रही है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग के कामकाज और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। EOU की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस अवैध धन के स्रोत क्या थे और इसमें अन्य कौन-कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
