ब्रेकिंग
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव
उदयपुर: पुलिस हिरासत से चकमा देकर भागे दो नाबालिग चोर, पहाड़ियों में तलाश जारीभोपाल के कटारा हिल्स में तेंदुए की दस्तक: रिहायशी इलाकों में दहशत, पार्क में आवाजाही पर लगी रोकग्वालियर में हनीट्रैप का खौफ: ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवक ने की आत्महत्या, दंपति पर केस दर्जलखनऊ: लारी कार्डियोलॉजी सेंटर में हर साल 8500 से ज्यादा हार्ट अटैक मरीजों को मिल रहा नया जीवनसुपौल: अवैध लेनदेन के विवाद में युवक का अपहरण, पुलिस ने 12 घंटे के भीतर सकुशल कराया बरामदकरौली की बेटी प्रिया गुप्ता का कमाल: पहले ही प्रयास में NEET-PG में लहराया सफलता का परचमधौलपुर: पिकअप हादसे में 4 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, पोखर किनारे से हटाए गए अवैध निर्माणझांसी के कारोबारी का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन, मध्य प्रदेश की नदी में मिला शव

रोहतक पीजीआई: एनेस्थीसिया विभाग के 63 साल पूरे होने पर जुटे 200 डॉक्टर, यादों के साथ साझा किए अनुभव

रोहतक के पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के एनेस्थीसिया विभाग ने 63 साल के सफर को यादों के साथ जिया। यादों से फिर मुलाकात नाम के इस मिलन समारोह में 1963 से लेकर अब तक के करीब 200 डॉक्टर एक मंच पर एकत्रित हुए।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
रोहतक पीजीआई: एनेस्थीसिया विभाग के 63 साल पूरे होने पर जुटे 200 डॉक्टर, यादों के साथ साझा किए अनुभव
मूल स्रोत

रोहतक स्थित पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (पीजीआईएमएस) के एनेस्थीसिया विभाग ने अपनी गौरवशाली 63 वर्षों की यात्रा का जश्न मनाया। इस विशेष अवसर पर 'यादों से फिर मुलाकात' शीर्षक से एक भव्य मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें वर्ष 1963 से लेकर अब तक विभाग से जुड़े रहे करीब 200 डॉक्टर एक मंच पर एकत्रित हुए। यह आयोजन पुराने साथियों और शिक्षकों के बीच पुरानी यादों को ताजा करने का एक भावनात्मक माध्यम बना।

छह दशकों का सफर और विकास की कहानी

समारोह के दौरान पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने विभाग के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी नींव 1963 में डॉ. जी.एल. कामरा द्वारा रखी गई थी। उस समय विभाग में मात्र 5 फैकल्टी सदस्य थे, लेकिन आज यह संख्या बढ़कर 54 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में संसाधनों की भारी कमी थी, लेकिन चिकित्सा के प्रति समर्पण ने इसे आज एक आधुनिक विभाग के रूप में स्थापित किया है, जहां अब एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम, पेन क्लिनिक और अत्याधुनिक आईसीयू सुविधाएं उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने एनेस्थीसिया विभाग की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में मरीज की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी इसी विभाग की होती है। उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि यहां से प्रशिक्षित होकर निकले चिकित्सक न केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी सेवाएं देकर संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं।

भावुक हुए डॉक्टर, साझा किए पुराने किस्से

मिलन समारोह में शामिल हुए डॉक्टरों के लिए यह समय बेहद यादगार रहा। कई वरिष्ठ चिकित्सकों ने दशकों बाद अपने शिक्षकों से मुलाकात की और उन्हें गले लगाकर पुरानी यादें ताजा कीं। 1985 बैच की डॉ. किरणप्रीत ने अपने छात्र जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि आज भी उनके बैच के सबसे अधिक डॉक्टर इस विभाग से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि भले ही हम सब अलग-अलग जगहों पर कार्यरत हैं, लेकिन दिल से हम आज भी उसी दौर में जी रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. के.एल. गर्ग ने अपने शायराना अंदाज में डॉक्टर और मरीज के बीच के गहरे रिश्ते को परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रकृति की बेचैनी को केवल बादल समझ सकते हैं, उसी तरह एक डॉक्टर मरीज के दर्द और उसकी पीड़ा को गहराई से महसूस करता है। इस दौरान डॉक्टरों ने रैंप वॉक भी किया, जिसने समारोह में एक अलग ही उत्साह भर दिया।

कोविड काल का योगदान और भविष्य की राह

निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के दौरान एनेस्थीसिया टीम के साहस को याद किया। उन्होंने कहा कि उस कठिन दौर में विभाग के डॉक्टरों ने फ्रंटलाइन पर रहकर जिस तरह से मरीजों की सेवा की, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य भविष्य में भी नई तकनीकों को अपनाकर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना है।

यह मिलन समारोह न केवल विभाग की उपलब्धियों का जश्न था, बल्कि इसने नई पीढ़ी के डॉक्टरों को अपने वरिष्ठों से प्रेरणा लेने का अवसर भी दिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी डॉक्टरों ने भविष्य में भी इस तरह के आयोजन जारी रखने और विभाग के विकास में अपना सहयोग देने का संकल्प लिया।

SponsoredMushfan Digital Studios - We Build Brands. We Grow Businesses.

टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें