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रेवाड़ी: नगर परिषद चेयरपर्सन के आवास के पास मां-बेटी पर गायों का जानलेवा हमला

रेवाड़ी में अब पशुओं के हमले नगर परिषद के चेयरपर्सन के घर तक पहुंच गए हैं। विनिता पीपल के घर के सामने गायों के झुंड ने पंजाबी मार्केट के पूर्व प्रधान सरदार बलजीत सिंह की पौत्री और पुत्रवधू पर हमला कर दिया।

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

11 सितंबर 20263 मिनट पढ़ें
रेवाड़ी: नगर परिषद चेयरपर्सन के आवास के पास मां-बेटी पर गायों का जानलेवा हमला
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चेयरपर्सन के घर के पास हुआ हादसा

हरियाणा के रेवाड़ी शहर में आवारा पशुओं का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला नगर परिषद की चेयरपर्सन विनीता पीपल के आवास के ठीक सामने सामने आया है, जहां गायों के एक झुंड ने मां और बेटी पर अचानक हमला कर दिया। पीड़ित महिलाएं पंजाबी मार्केट के पूर्व प्रधान सरदार बलजीत सिंह के परिवार से हैं। घटना के समय वे स्कूटी से वापस लौट रही थीं, तभी आवारा पशुओं ने उन्हें निशाना बनाया।

सरदार बलजीत सिंह ने बताया कि उनकी पुत्रवधू और पौत्री दुकान पर भोजन देने आई थीं। लौटते समय जैसे ही वे चेयरपर्सन के घर के पास पहुंचीं, वहां मौजूद गायों के झुंड ने उन पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गई हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय निवासियों में भारी रोष है और लोगों का कहना है कि अब शहर की सड़कों पर निकलना भी असुरक्षित हो गया है।

पाँच दिनों में दो मौतों से दहला शहर

रेवाड़ी में पशुओं के हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले अगस्त महीने में महज पांच दिनों के भीतर दो लोगों की मौत आवारा पशुओं के हमले में हो चुकी है। सेक्टर-4 निवासी कैप्टन जगराम यादव की मौत तब हुई जब वे सब्जी लेकर घर लौट रहे थे। इसी तरह, माता चौक पर प्रताप सिंह यादव पर भी गायों के झुंड ने हमला किया था, जिसमें उनकी जान चली गई थी। इन घटनाओं के सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे।

प्रशासन ने इन घटनाओं के बाद शहर को पशु-मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। दावों के विपरीत, पशुओं के हमले लगातार जारी हैं, जिससे आम जनता में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

प्रशासन और पशुपालकों के बीच बेबस तंत्र

शहर में आवारा पशुओं की समस्या के पीछे पशुपालकों की लापरवाही भी एक बड़ा कारण है। नगर परिषद द्वारा 15 अगस्त से शुरू किए गए कैटल कैप्चर अभियान के दौरान भी कई बार पशुपालकों द्वारा कर्मचारियों को धमकाने और पशुओं को जबरन छुड़ा ले जाने के मामले सामने आए हैं। इसके वीडियो भी वायरल हुए हैं, लेकिन प्रशासन इन दबंग पशुपालकों पर कोई प्रभावी कार्रवाई करने में अब तक नाकाम रहा है।

पुलिस ने 17 अगस्त को तीन पशुपालकों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, लेकिन 13 दिनों के बाद भी उनमें से केवल दो को ही गिरफ्तार किया जा सका है। यह ढीली कार्रवाई प्रशासन की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाती है। स्थानीय विधायक लक्ष्मण सिंह यादव और पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है और तुरंत समाधान की मांग की है।

आगे की राह और प्रशासनिक निर्देश

रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा ने स्पष्ट किया है कि शहर को पशु-मुक्त बनाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि सड़कों पर घूमने वाले पशुओं को पकड़कर गोशालाओं और नंदीशालाओं में भेजा जाए। साथ ही, जो पशुपालक अपने पालतू पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ेंगे, उनके खिलाफ सख्त एफआईआर दर्ज की जाएगी। डीसी ने पुलिस को भी निर्देश दिए हैं कि ऐसे मामलों में बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल, शहरवासी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि प्रशासन के ये कड़े निर्देश कब तक धरातल पर उतरेंगे। जब तक आवारा पशुओं को सड़कों से पूरी तरह नहीं हटाया जाता, तब तक आम नागरिकों के लिए खतरा बना रहेगा। लोग अब प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि वे केवल आश्वासन न देकर ठोस और स्थायी समाधान निकालें ताकि भविष्य में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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