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रतिया: दो साल बाद भी नहीं मिला तोड़फोड़ का मुआवजा, नगर पालिका कार्यालय पहुंचे पीड़ित परिवार

Ratia residents protest at municipal office for 2022 demolition compensation. फतेहाबाद जिले में रतिया के सती मंदिर के पास स्थित बस्ती के लगभग 11 परिवारों के मुखिया सोमवार को नगर पालिका कार्यालय पहुंचे। उन्होंने दो वर्ष पूर्व उनके घरों में हुई कथित तोड़फोड़ के नुकसान के मुआवजे की मांग की।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

28 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1K
रतिया: दो साल बाद भी नहीं मिला तोड़फोड़ का मुआवजा, नगर पालिका कार्यालय पहुंचे पीड़ित परिवार
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दो साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे पीड़ित

फतेहाबाद जिले के रतिया में सती मंदिर के समीप बसी एक बस्ती के 11 परिवारों ने सोमवार को नगर पालिका कार्यालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। इन परिवारों का आरोप है कि करीब दो साल पहले उनके घरों में की गई तोड़फोड़ के बाद उन्हें जो आश्वासन दिए गए थे, वे आज तक पूरे नहीं हुए हैं। पीड़ित परिवारों के मुखिया अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला।

बस्ती के प्रतिनिधि राम भगत ने बताया कि उनके परिवार पिछले 80 वर्षों से अग्रवाल धर्मशाला के पास स्थित करीब तीन कनाल आठ मरला भूमि पर रह रहे हैं। उनके पूर्वज लंबे समय से शहर में चौकीदारी का काम करते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगस्त 2022 में नगर पालिका के तत्कालीन अधिकारियों ने भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर उनके घरों को तोड़ दिया था और उनका घरेलू सामान भी हटा दिया था।

आश्वासन के बाद भी कार्रवाई शून्य

राम भगत के अनुसार, तोड़फोड़ की घटना के तुरंत बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों के सहयोग से बस्तीवासियों ने धरना प्रदर्शन शुरू किया था। उस समय प्रशासन ने उन्हें नुकसान की भरपाई करने और जमीन की रजिस्ट्री कराने का लिखित या मौखिक आश्वासन दिया था, जिसके बाद धरना समाप्त कर दिया गया था। हालांकि, दो साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी न तो उन्हें कोई मुआवजा राशि दी गई और न ही जमीन के मालिकाना हक को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया।

पीड़ितों का कहना है कि वे प्रशासन के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री जनसंवाद पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। पोर्टल पर शिकायत के बाद नगर पालिका अधिकारियों ने उन्हें सोमवार को बातचीत के लिए कार्यालय बुलाया था, लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें घंटों इंतजार करने के बाद भी किसी अधिकारी से मुलाकात नहीं हो सकी।

अधिकारियों की गैर-मौजूदगी से बढ़ा आक्रोश

नगर पालिका कार्यालय पहुंचे बस्तीवासियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बुलाने के बावजूद अधिकारी खुद वहां मौजूद नहीं थे। कार्यालय में मौजूद अन्य कर्मचारियों ने भी उनकी समस्याओं को सुनने या समाधान करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इस उपेक्षापूर्ण रवैये से आक्रोशित बस्तीवासियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

वर्तमान में, इन परिवारों के सामने रहने और अपने अधिकारों को पाने का संकट गहरा गया है। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन तुरंत प्रभाव से उनके नुकसान का आकलन करे और उचित मुआवजा प्रदान करे। साथ ही, वे अपनी जमीन के लंबित मामले का स्थायी समाधान चाहते हैं। इस पूरे मामले पर नगर पालिका प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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