राजस्थान में गहराया जल संकट: 246 बांध सूखे, बीसलपुर में पानी की एक बूंद भी नहीं
राजस्थान में इस बार कमजोर मानसून ने प्रदेशवासियों की चिंता बढ़ा दी है। जयपुर-अजमेर जैसे 4 जिलों की लगभग 1.16 करोड़ आबादी की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में इस बार एक इंच भी पानी नहीं आया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

राजस्थान में इस वर्ष मानसून की बेरुखी ने प्रदेशवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राज्य के जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 693 बांधों में से 246 बांध पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। बारिश की कमी के कारण बांधों में जल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई के लिए गंभीर संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।
बीसलपुर बांध की स्थिति चिंताजनक
जयपुर और अजमेर सहित चार जिलों की करीब 1.16 करोड़ आबादी की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध के हालात सबसे अधिक चिंताजनक बने हुए हैं। इस मानसून सीजन में अब तक बांध के जल स्तर में एक इंच की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में बांध में पानी का स्तर काफी कम है, जबकि पिछले साल अगस्त की शुरुआत तक यह बांध लबालब भर चुका था।
राज्य के बांधों को जल संसाधन विभाग ने छह जोन में विभाजित किया है। इनमें जोधपुर जोन के बांधों की स्थिति सबसे खराब है, जहां जवाई और जसवंत सागर जैसे प्रमुख बांधों में पिछले भराव की तुलना में 35 फीसदी तक पानी कम हो गया है। इसी तरह भरतपुर, जयपुर, कोटा और बांसवाड़ा जोन में भी जल आवक न के बराबर है, जिससे बांधों का जल स्तर लगातार घट रहा है।
23 जिलों में सूखे जैसे हालात
प्रदेश के 23 जिलों में वर्तमान में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। 31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अलनीनो और हिंद महासागर में इंडियन ओशन डाइपोल की तटस्थ स्थिति के कारण मानसून कमजोर पड़ा है। अगस्त और सितंबर में भी अच्छी बारिश की संभावना कम ही नजर आ रही है।
राज्य के कुल 693 बांधों में से केवल 15 बांध ही ऐसे हैं जो पूरी तरह भरे हुए हैं, जिनमें से अधिकांश छोटे बांध हैं। शेष 432 बांधों में भी पानी का स्तर औसत से काफी नीचे है। पिछले मानसून में जो बांध पूरी तरह भरे थे, उनमें से अब तक 35 फीसदी पानी खर्च हो चुका है, जिससे जल प्रबंधन की चुनौती और अधिक बढ़ गई है।
सरकार का रुख और किसानों की चिंता
जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने स्वीकार किया कि मानसून के कमजोर रहने से बांध खाली हैं। उन्होंने कहा कि पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर सरकार आश्वस्त है और अगली गर्मियों तक पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा। हालांकि, सिंचाई के लिए पानी की मांग कर रहे किसानों के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जब बारिश ही नहीं हो रही है, तो बांधों में पानी की आवक संभव नहीं है। सरकार का प्रयास वाटर मैनेजमेंट के जरिए किसानों को राहत देने का है।
यदि आने वाले दिनों में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो राज्य में पेयजल संकट के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है। किसानों के लिए सिंचाई हेतु पानी का प्रबंध करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल, विभाग पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मानसून के शेष दिनों में बारिश की उम्मीद की जा रही है।

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मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!