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राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: कंबोडिया-म्यांमार में चल रहे साइबर स्लेवरी रैकेट के 3 और आरोपी गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाना ने अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई करते हुए तीन और शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह नेटवर्क कंबोडिया, म्यांमार सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भारतीय युवाओं को नौकरी का झांसा देकर बंधक बनाता था और उनसे करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करवाता था।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान पुलिस का बड़ा एक्शन: कंबोडिया-म्यांमार में चल रहे साइबर स्लेवरी रैकेट के 3 और आरोपी गिरफ्तार
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अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के खिलाफ राजस्थान पुलिस की बड़ी कार्रवाई

राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाने ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही अब तक इस मामले में कुल आठ शातिर अपराधी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। यह गिरोह दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर उनसे जबरन साइबर ठगी करवाने का काम कर रहा था।

एडीजी (साइबर क्राइम) वीके सिंह के अनुसार, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से मिली खुफिया जानकारी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस लगातार इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट चीनी माफिया के इशारों पर काम कर रहा था, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय युवाओं को झांसे में लेकर उनसे करोड़ों रुपये की अवैध कमाई करना था।

नौकरी का झांसा और साइबर गुलामी का जाल

आरोपियों का यह गिरोह राजस्थान सहित देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को निशाना बनाता था। उन्हें 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रति माह वेतन का प्रलोभन देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड भेजा जाता था। विदेश पहुंचते ही इन युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र जब्त कर लिए जाते थे। इसके बाद उन्हें 'साइबर स्कैम कंपाउंड' में बंधक बनाकर डिजिटल अरेस्ट, क्रिप्टो फ्रॉड, ऑनलाइन ट्रेडिंग और जॉब स्कैम जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए मजबूर किया जाता था।

हाल ही में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों की पहचान आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया के रूप में हुई है। जांच में पता चला है कि फिरोज काठात ने खुद कंबोडिया के स्कैम सेंटर में एक साल तक काम किया था, जहां उसने महिला बनकर सोशल मीडिया पर लोगों को फंसाने की ट्रेनिंग ली थी। वहीं, कानू सिंह ने कमीशन के लालच में चार अन्य युवाओं को भी इस दलदल में धकेला था।

डिजिटल साक्ष्यों से खुल रहे नेटवर्क के गहरे तार

पुलिस ने इससे पहले कोलकाता से जीतूराज, रवि और अनिल को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन, वीपीएन डेटा, व्हाट्सएप चैट और क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन के रिकॉर्ड से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले इस नेटवर्क के कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब इस गिरोह के हवाला नेटवर्क और म्यूल बैंक खातों की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अपराध से जुड़ी धनराशि किन-किन देशों में भेजी गई।

यह पूरी कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन में डीएसपी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई। इसमें चित्तौड़गढ़ और उदयपुर की साइबर टीमों के साथ मिलकर स्टेट साइबर क्राइम थाना जयपुर के अधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई है। पुलिस की टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह के तार और किन-किन देशों में फैले हुए हैं।

आमजन के लिए पुलिस की चेतावनी

राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि विदेश में नौकरी के किसी भी लुभावने ऑफर को स्वीकार करने से पहले कंपनी और एजेंसी का सत्यापन जरूर करें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना पासपोर्ट या मूल दस्तावेज न सौंपें। सोशल मीडिया पर निवेश या गारंटीड रिटर्न के झांसे में आने से बचें। यदि कोई संदिग्ध लिंक या ऐप डाउनलोड करने के लिए कहे, तो सतर्क हो जाएं।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी या डिजिटल अरेस्ट का शिकार होता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या आधिकारिक वेबसाइट www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। पुलिस का मानना है कि समय पर दी गई सूचना ही इस तरह के अंतरराष्ट्रीय गिरोहों को रोकने में सबसे प्रभावी हथियार है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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