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राजस्थान: सरकारी स्कूलों की हकीकत परखेंगे अधिकारी, हर महीने करेंगे चार दिन रात्रि विश्राम

राजस्थान में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए अब महीने में चार दिन पीईईओ से लेकर संयुक्त निदेशक तक सरकारी स्कूलों में रात्रि विश्राम करेंगे। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि इससे अधिकारी संबंधित स्कूलों की जमीनी हकीकत जान सकेंगे और अभिभावकों से भी सीधे बातचीत कर सकेंगे।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
राजस्थान: सरकारी स्कूलों की हकीकत परखेंगे अधिकारी, हर महीने करेंगे चार दिन रात्रि विश्राम
मूल स्रोत

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने नए निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत अब शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हर महीने चार दिन सरकारी स्कूलों में रात्रि विश्राम करना अनिवार्य होगा। यह पहल स्कूलों की जमीनी हकीकत को समझने और समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू की गई है।

अधिकारियों के लिए अनिवार्य होगा रात्रि प्रवास

नए आदेशों के अनुसार, पीईईओ (PEEO) स्तर से लेकर संयुक्त निदेशक स्तर तक के अधिकारियों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। इन अधिकारियों को महीने में कम से कम चार स्कूलों का चयन करना होगा और वहां शाम 6 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 6 बजे तक रुकना होगा। इस दौरान वे न केवल स्कूल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे, बल्कि वहां के माहौल और शैक्षणिक गतिविधियों का भी बारीकी से अवलोकन करेंगे।

निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया 'राज शाला संबलन' मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से संचालित की जाएगी। इस ऐप में 'रात्रि विश्राम/भ्रमण' का एक नया विकल्प जोड़ा गया है, जहां अधिकारी अपनी रिपोर्ट दर्ज करेंगे। इससे विभाग के उच्च अधिकारियों को राज्य भर के स्कूलों की वास्तविक स्थिति का डिजिटल डेटा प्राप्त हो सकेगा।

समुदाय और शिक्षकों से सीधा संवाद

रात्रि विश्राम के दौरान संबंधित अधिकारी स्कूल के स्टाफ, विद्यार्थियों और स्थानीय अभिभावकों या प्रबुद्धजनों के साथ चर्चा करेंगे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य स्कूल की वर्तमान चुनौतियों, जैसे कि आधारभूत संरचना, पेयजल, शौचालय और शिक्षण स्तर से जुड़ी समस्याओं को समझना है। अधिकारियों का मानना है कि सीधे संवाद से उन समस्याओं का पता चल पाएगा जो अक्सर कागजी रिपोर्टों में दर्ज नहीं हो पातीं।

टोंक जिले सहित पूरे राज्य में इस नई व्यवस्था को लागू करने की तैयारी है। टोंक में लगभग डेढ़ हजार सरकारी स्कूल हैं, जहां इस पहल से शैक्षणिक वातावरण में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियों और रिपोर्टों के आधार पर ही भविष्य में समस्याओं के निराकरण के लिए विभागीय स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे।

समीक्षा बैठक और जवाबदेही

विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल रात्रि विश्राम करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि इसके बाद नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में 'राज शाला संबलन' ऐप पर अपलोड की गई रिपोर्टों और लक्ष्य प्राप्ति की प्रगति पर चर्चा होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अधिकारी न केवल स्कूलों का दौरा करें, बल्कि वहां की समस्याओं का समाधान भी सुनिश्चित करें।

शिक्षक संघों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने कहा कि यदि इस योजना को पूरी ईमानदारी और गंभीरता से लागू किया जाता है, तो इससे सरकारी स्कूलों की प्रशासनिक और शैक्षणिक स्थिति में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने जोर दिया कि इस व्यवस्था की शत-प्रतिशत पालना सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि इसका लाभ सीधे विद्यार्थियों को मिल सके।

यह पहल शिक्षा विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने और स्कूलों को अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि धरातल पर यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और इससे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों का विश्वास कितना बढ़ता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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