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रायसेन: 265 करोड़ की सड़क परियोजना बनी मुसीबत, कीचड़ में फंसी बसें और बढ़ रहे हादसे

Raisen road widening project faces public ire for alleged mismanagement and corruption. रायसेन सेराहतगढ़ सड़क चौड़ीकरण में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 763
रायसेन: 265 करोड़ की सड़क परियोजना बनी मुसीबत, कीचड़ में फंसी बसें और बढ़ रहे हादसे
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सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बदहाल व्यवस्था

रायसेन-राहतगढ़ स्टेट हाईवे-42 पर चल रहा 265 करोड़ रुपए की लागत वाला सड़क चौड़ीकरण कार्य स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। निर्माण कार्य में बरती जा रही कथित लापरवाही और बदइंतजामी के कारण इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित हो रहा है। बारिश के मौसम में सड़क को जगह-जगह खोद दिए जाने के बाद उचित डायवर्जन न होने से वाहन चालक कीचड़ में फंसने को मजबूर हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। नियमानुसार, सड़क के एक हिस्से पर काम चलते समय दूसरे हिस्से को यातायात के लिए सुचारू रखा जाना चाहिए था, लेकिन निर्माण एजेंसी ने पूरी सड़क को खोद दिया है। इसके चलते पिछले आठ दिनों में तीसरी बार बस के कीचड़ में फंसने की घटना सामने आई है, जिससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

युवा कांग्रेस का विरोध और जांच की मांग

सड़क की दुर्दशा और निर्माण कार्य में बरती जा रही लापरवाही के खिलाफ युवा कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार शाम को संगठन के कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन सोलंकी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तहसीलदार भरत सिंह को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें इस पूरी परियोजना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी ने सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। पुलिया निर्माण के दौरान न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग की गई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि हाल ही में दो बाइक सवार पुलिया में गिर गए थे, जिनमें से एक युवक की दुखद मौत हो गई। प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी और जनता का आक्रोश

सड़क निर्माण के दौरान बनाए गए अस्थायी डायवर्जन भी बारिश की मार नहीं झेल पा रहे हैं। मिट्टी के धंसने के कारण ये डायवर्जन खुद हादसों को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने निर्माण एजेंसी पर दबाव नहीं बनाया, तो भविष्य में और भी बड़ी दुर्घटनाएं हो सकती हैं। बारिश के दौरान कीचड़ और गड्ढों के कारण यह मार्ग पूरी तरह से असुरक्षित हो चुका है।

आम जनता ने मांग की है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए और बारिश के दौरान सुरक्षित आवागमन के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं। लोगों का तर्क है कि करोड़ों की परियोजना का उद्देश्य जनसुविधा होना चाहिए, न कि लोगों की जान जोखिम में डालना। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ज्ञापन के बाद निर्माण एजेंसी पर क्या कार्रवाई करता है।

प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा

फिलहाल, इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हाईवे पर यातायात की स्थिति को सामान्य बनाने और सुरक्षा मानकों को लागू करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। निर्माण कार्य की गति और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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