राहुल गांधी समेत 5 सांसदों पर जमुई कोर्ट में परिवाद दायर, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
Jamui court summons Rahul Gandhi and MPs over religious sentiments controversy. जमुई व्यवहार न्यायालय में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पांच सांसदों के खिलाफ एक परिवाद दायर किया गया है। यह परिवाद संसद परिसर में कथित नाट्य प्रदर्शन को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में दाखिल किया है।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

संसद परिसर में प्रदर्शन पर कानूनी संकट
बिहार के जमुई व्यवहार न्यायालय में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित पांच प्रमुख सांसदों के खिलाफ एक परिवाद दायर किया गया है। यह मामला संसद परिसर में किए गए एक कथित नाट्य प्रदर्शन से जुड़ा है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत में यह शिकायत दर्ज कराई है, जिसे परिवाद वाद संख्या 1004/2026 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
इस कानूनी शिकायत में राहुल गांधी के अलावा अन्य चार सांसदों को भी पक्षकार बनाया गया है। इनमें पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद, मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा और आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव शामिल हैं। इन सभी पर संसद भवन के भीतर अनुचित प्रदर्शन करने का आरोप लगाया गया है।
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप
परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता राजीव रंजन का तर्क है कि सांसदों द्वारा किया गया यह प्रदर्शन सीधे तौर पर सनातन धर्म के अनुयायियों की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस विषय को लेकर यह प्रदर्शन किया गया, वह पहले से ही जांच के दायरे में है। अधिवक्ता के अनुसार, उस मामले का मुख्य आरोपी रामाशंकर यादव है, न कि कोई साधु-संत, फिर भी प्रदर्शन के माध्यम से एक विशेष वर्ग को निशाना बनाने की कोशिश की गई।
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि इस मामले की जांच वर्तमान में सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रही है। ऐसे संवेदनशील समय में सार्वजनिक रूप से नाट्य प्रदर्शन करना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप और मामले को राजनीतिक रंग देने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों ने केवल सुर्खियां बटोरने के लिए ऐसा किया है।
सहिष्णुता का लाभ उठाने का दावा
शिकायतकर्ता ने यह भी तर्क दिया है कि यदि इसी तरह का प्रदर्शन किसी अन्य समुदाय से जुड़े मामलों में किया जाता, तो उसकी प्रतिक्रिया और परिणाम काफी अलग होते। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म के अनुयायियों की सहनशीलता और सहिष्णुता का लाभ उठाकर यह प्रदर्शन किया गया, जिससे समाज में गलत संदेश गया है।
अदालत में दायर इस परिवाद के बाद अब न्यायिक प्रक्रिया शुरू हो गई है। जमुई न्यायालय इस मामले की सुनवाई करेगा और आगे की कानूनी कार्यवाही तय करेगा। फिलहाल, इस मामले में किसी भी पक्ष की ओर से कोई अंतिम निर्णय या दोष सिद्ध नहीं हुआ है। आरोपों की सत्यता और कानूनी पहलुओं पर स्पष्टता न्यायिक प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद ही सामने आएगी।
आगे की न्यायिक प्रक्रिया
न्यायालय अब यह देखेगा कि क्या दायर किए गए परिवाद में प्रथम दृष्टया कोई मामला बनता है। यदि अदालत इसे स्वीकार करती है, तो संबंधित सांसदों को नोटिस जारी किया जा सकता है। यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रह सकता है, क्योंकि इसमें विपक्ष के कई बड़े चेहरे शामिल हैं।
इस घटनाक्रम ने संसद की गरिमा और सांसदों के आचरण को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जमुई कोर्ट के इस फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं कि अदालत इस परिवाद पर क्या रुख अपनाती है और आगे क्या निर्देश जारी किए जाते हैं।

Editor in chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
