सोनिया गांधी के संस्मरण पर पेंगुइन इंडिया ने तोड़ी चुप्पी, बाहरी दबाव के दावों को किया खारिज
प्रकाशक ने कहा कि इस फैसले के पीछे कोई बाहरी दबाव नहीं था, बल्कि ‘Belonging: A Journey of Love’ पर चर्चा के दौरान एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। PRHI ने उस मुद्दे की जानकारी नहीं दी।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के बहुप्रतीक्षित संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के प्रकाशन को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (PRHI) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रकाशक ने उन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि इस किताब को प्रकाशित न करने के पीछे कोई बाहरी दबाव था। पेंगुइन इंडिया का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से संपादकीय चर्चाओं और आपसी सहमति न बन पाने के कारण लिया गया है।
संपादकीय प्रक्रिया में नहीं बनी सहमति
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि वे इस किताब को प्रकाशित करने के लिए बेहद उत्साहित थे और इसे हासिल करने के लिए उन्होंने काफी प्रयास भी किए थे। उन्होंने बताया कि पांडुलिपि सामान्य संपादकीय प्रक्रिया से गुजरी थी, जिसके दौरान कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। कुछ विषयों पर लेखक की टीम के साथ सहमति बनी, लेकिन एक विशेष मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना रहा।
प्रकाशक ने यह भी साफ किया कि वे किसी भी तरह के बाहरी दबाव में नहीं थे। उनके अनुसार, एक प्रकाशक के रूप में पांडुलिपि का आलोचनात्मक आकलन करना, सवाल पूछना और संपादकीय सुझाव देना उनकी मानक प्रक्रिया का हिस्सा है। अंत में, सोनिया गांधी की टीम ने ही प्रकाशन की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाने का निर्णय लिया, जिसका प्रकाशक ने सम्मान किया है।
गोपनीयता का हवाला देकर मुद्दे का खुलासा नहीं
विवाद के केंद्र में रहे उस 'खास मुद्दे' के बारे में पेंगुइन इंडिया ने कोई भी जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है। प्रवक्ता ने कहा कि वे एक कानूनी समझौते से बंधे हैं और लेखक की गोपनीयता उनके लिए सर्वोपरि है। इसलिए, वे यह स्पष्ट नहीं कर सकते कि किस विशिष्ट बिंदु पर असहमति पैदा हुई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी तरह से एक स्वतंत्र संपादकीय निर्णय था।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने किताब के प्रकाशन को लेकर सवाल उठाए थे। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने आरोप लगाया था कि प्रकाशक पर सरकारी दबाव डाला गया है, ताकि किताब के कुछ हिस्सों को हटाया जा सके। इन नेताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया था।
10 नवंबर को वैश्विक स्तर पर होगी रिलीज
हालांकि भारत में पेंगुइन इंडिया इसे प्रकाशित नहीं कर रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस किताब को लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है। पेंगुइन रैंडम हाउस की अमेरिकी इकाई 'अल्फ्रेड ए नॉफ' ने घोषणा की है कि यह संस्मरण 10 नवंबर को दुनिया भर में जारी किया जाएगा। इस किताब में सोनिया गांधी के इटली में बचपन, नेहरू-गांधी परिवार में उनके आगमन, राजीव गांधी की हत्या और उनके राजनीतिक सफर के अनछुए पहलुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रकाशन जगत में संपादकीय स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव के बीच के नाजुक संतुलन पर एक नई बहस छेड़ दी है। पेंगुइन इंडिया ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके निर्णय व्यावसायिक और संपादकीय मानकों के आधार पर लिए जाते हैं, न कि किसी बाहरी हस्तक्षेप के कारण।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!