संसद का मानसून सत्र आज से: पेपर लीक और महंगाई पर विपक्ष के हंगामे के आसार, सरकार पेश करेगी 7 अहम बिल
Parliament Monsoon Session 2026 Day 1 LIVE Update.

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

संसद का मानसून सत्र आज सोमवार से शुरू हो रहा है, जिसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। सत्र की शुरुआत से पहले रविवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, जिसमें कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके समेत 40 दलों के 58 नेताओं ने हिस्सा लिया। 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस 25 दिवसीय सत्र में कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों की सूची तैयार की है। इनमें नीट-यूजी पेपर लीक मामला, महंगाई, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी, वांगचुक का अनशन और एसआईआर जैसे ज्वलंत विषय शामिल हैं। सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद भवन के हंसद्वार पर मीडिया को संबोधित करेंगे।
सरकार के एजेंडे में 7 विधेयक
सरकार इस सत्र में कुल 7 विधेयक पेश करने की तैयारी में है। लोकसभा में 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' पेश किया जाएगा, जो मई में जारी अध्यादेश का स्थान लेगा। इसके तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की जाएगी। वहीं, राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 'राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2026' पेश करेंगे।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रगीत 'वंदेमातरम' को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। वर्तमान में 1971 के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और संविधान का अपमान करने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। अब वंदेमातरम के अपमान को भी इसी दायरे में लाकर दंडनीय बनाया जाएगा।
सदन में बदलाव और समीकरण
लोकसभा में इस बार कई बदलाव देखने को मिलेंगे। स्पीकर ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को बैठने के लिए नई जगह आवंटित की है। इसके साथ ही अभिषेक बनर्जी, हरसिमरत कौर बादल और पीवी मिथुन रेड्डी समेत कई वरिष्ठ सांसदों की सीटिंग व्यवस्था में भी फेरबदल किया गया है। सत्र में टीएमसी के बागियों से बनी 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' का भी संसदीय डेब्यू होगा।
सदन में एनडीए की संख्या बल में भी वृद्धि हुई है। पिछले दो वर्षों में लोकसभा में एनडीए के 19 और राज्यसभा में 40 सांसद बढ़े हैं। हालांकि, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे बड़े संवैधानिक संशोधनों के लिए सरकार को अभी भी दो-तिहाई बहुमत की दरकार है, जिसके लिए वह विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाने की कोशिश कर रही है।
अटके हुए प्रमुख बिल
कई महत्वपूर्ण विधेयक फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास विचाराधीन हैं, जिससे उनके इस सत्र में आने की संभावना कम है। इनमें 'एक देश-एक चुनाव' बिल, केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक और 30 दिन जेल होने पर पीएम-सीएम को हटाने वाला प्रस्तावित कानून शामिल है। जेपीसी ने इन पर अपनी रिपोर्ट को फिलहाल टाल दिया है और संबंधित पक्षों से और चर्चा की आवश्यकता जताई है।
सरकार के सामने चुनौती यह है कि संविधान संशोधन बिलों को पारित कराने के लिए उसे लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 161 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार या तो विपक्ष के कुछ सांसदों को अपने साथ लाने का प्रयास कर रही है या फिर मतदान के दौरान विपक्षी सदस्यों की अनुपस्थिति सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
