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NEET विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस की 13 FIR रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

नई दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 सितंबर 20262 मिनट पढ़ें
NEET विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस की 13 FIR रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज
मूल स्रोत

सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई

नीट (NEET) पेपर लीक मामले के विरोध में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई 13 एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में शीर्ष अदालत में एक याचिका दायर की है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले में तत्काल सुनवाई का आग्रह किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ करेगी।

दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करने का अनुरोध किया है। पुलिस का कहना है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के निर्णय के अनुरूप, वे इन प्रदर्शनों से जुड़ी पुरानी एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, पुलिस ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे 2,873 लोगों की भूमिका की गहन जांच के लिए नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति भी मांगी है।

आपराधिक पृष्ठभूमि और नई जांच का आधार

पुलिस ने कोर्ट को बताया कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे लोग मौजूद थे जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि क्या इन लोगों की भूमिका हिंसा फैलाने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में थी। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि नई एफआईआर केवल इन 2,873 संदिग्धों के खिलाफ ही दर्ज की जाएगी और इसे भविष्य के लिए मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की रिहाई के संबंध में 'आपराधिक पृष्ठभूमि' की परिभाषा स्पष्ट की थी। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों को ही इस श्रेणी में रखा जाए, जबकि अन्य छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को राज्य सरकारें कानून के दायरे में वापस ले सकती हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और आगामी मार्च

यह पूरा विवाद 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुए नीट प्रदर्शनों से जुड़ा है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। 25 जुलाई को सरकार के साथ सहमति बनने के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की थी।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के अवसर पर दिल्ली में दोबारा मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने जुलाई में किए गए अपने वादों को पूरा नहीं किया है। इस प्रस्तावित मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे जिन्होंने परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या जैसा कदम उठाया था। पुलिस की नई एफआईआर की मांग और प्रदर्शनकारियों की आगामी योजना के बीच आज की सुनवाई काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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