NEET पेपर लीक: CBI की चार्जशीट में बड़ा खुलासा, NTA के विशेषज्ञों ने रची थी महीनों पहले साजिश
National Eligibility cum Entrance Test (Undergraduate) UG Paper Leak Case Update; नीट-यूपी 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी। CBI ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट में यह दावा किया है।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

नीट-यूजी 2026 परीक्षा में हुए पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक विस्तृत 94 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनसे पता चलता है कि यह पेपर लीक कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, बल्कि परीक्षा से कई महीने पहले रची गई एक सोची-समझी गहरी साजिश थी।
NTA के विशेषज्ञों की मिलीभगत
जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे रैकेट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन विशेषज्ञ सीधे तौर पर शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने पेपर तैयार करने और मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। आरोप है कि ये विशेषज्ञ पेपर सेट करते समय ही सवालों को याद कर लेते थे और बाद में होटल में जाकर उन्हें कागज की पर्चियों पर नोट कर लेते थे। इन पर्चियों को बिचौलियों के माध्यम से कोचिंग संचालकों तक पहुंचाया जाता था।
CBI की रिपोर्ट में मनीषा गुरुनाथ मंधारे, पीवी कुलकर्णी और मनीषा संजय हवलदार को मुख्य आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। कुलकर्णी द्वारा केमिस्ट्री के 135 सवालों को रफ पेपर पर नोट करने के सबूत भी मिले हैं। इन सवालों को बाद में टेलीग्राम, वॉट्सएप और अन्य डिजिटल माध्यमों से छात्रों तक पहुंचाया गया, ताकि डिजिटल फुटप्रिंट न छोड़े जाएं।
कोचिंग माफिया और बिचौलियों का नेटवर्क
यह साजिश केवल NTA तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें निजी कोचिंग संस्थानों के संचालक और बिचौलिए भी शामिल थे। जांच में सामने आया है कि कोचिंग संचालकों ने परीक्षा से काफी पहले ही NTA के विशेषज्ञों से संपर्क साध लिया था। इस नेटवर्क में डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी के तेजस शाह और रेणुकाई करियर सेंटर के शिवराज मोटेगांवकर जैसे नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने लीक पेपर को छात्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
एजेंसी को तलाशी के दौरान कई हाथ से लिखी कॉपियां मिली हैं, जो यह साबित करती हैं कि छात्रों को लीक सवाल हाथ से लिखवाए जाते थे। यह तरीका डिजिटल सबूतों से बचने के लिए अपनाया गया था। इसके अलावा, आरोपियों के बैंक खाते, लॉकर और डीमैट अकाउंट्स को भी फ्रीज कर दिया गया है, क्योंकि इस पूरे खेल में भारी मात्रा में पैसों का लेन-देन हुआ था।
कानूनी शिकंजा और संभावित सजा
CBI ने सभी 13 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो NTA के विशेषज्ञों और अन्य दोषियों को आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के आरोपों के बाद भारी विवाद खड़ा हो गया। छात्रों के विरोध और अनियमितताओं के दावों के बाद सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी और 21 जून को इसे दोबारा आयोजित किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने देश भर में शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
