नवादा: 12 साल पुराने रिश्वतखोरी मामले में पूर्व सीओ भोला पासवान को 4 साल की सजा
Nawada vigilance court convicts former CO Bhola Paswan in bribery case. नवादा में रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) भोला पासवान को 12 साल पुराने रिश्वतखोरी मामले में विशेष निगरानी अदालत ने चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा के साथ 10 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

12 साल पुराने मामले में आया फैसला
बिहार के नवादा जिले में भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले में विशेष निगरानी अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। रोह अंचल के तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) भोला पासवान को अदालत ने रिश्वतखोरी का दोषी करार देते हुए चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के साथ ही उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
यह मामला करीब 12 साल पुराना है, जब भोला पासवान रोह अंचल में तैनात थे। उन पर एक ग्रामीण से जमीन संबंधी कार्य के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के मूल्यांकन के बाद अब अदालत ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया है, जो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
क्या था पूरा मामला और कैसे बिछाया गया जाल
मामले की शुरुआत 2014 में हुई थी। रोह थाना क्षेत्र के समरेरा गांव निवासी राकेश कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि तत्कालीन सीओ भोला पासवान उनके भूमि विवाद से जुड़े एक कार्य के लिए रिश्वत की मांग कर रहे थे। राकेश कुमार को अपने घर में दरवाजा, खिड़की और बांस लगाने की अनुमति चाहिए थी, जिसके बदले सीओ ने चार हजार रुपये की मांग की थी।
शिकायत मिलने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मामले का सत्यापन किया। आरोप सही पाए जाने पर टीम ने 15 अक्टूबर 2014 को एक जाल बिछाया। जैसे ही तत्कालीन सीओ भोला पासवान ने रिश्वत के चार हजार रुपये लिए, निगरानी टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी ने उस समय पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी थी।
अदालत में चली लंबी सुनवाई
गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच पूरी कर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अपना पक्ष रखा और कुल 11 गवाहों को अदालत में पेश किया। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक ने मामले की प्रभावी पैरवी की, जिससे आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की पुष्टि हुई।
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा-7 और धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भोला पासवान को दोषी पाया। साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने धारा-7 के तहत तीन वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना, तथा धारा 13(2) के तहत चार वर्ष की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
इस फैसले को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। एक सरकारी अधिकारी का इतने लंबे समय बाद दोषी करार दिया जाना यह दर्शाता है कि कानून की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में जवाबदेही तय की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी।
यह सजा न केवल पूर्व सीओ के लिए एक सबक है, बल्कि उन सभी लोक सेवकों के लिए भी चेतावनी है जो अपने कर्तव्यों के निर्वहन के बदले अनुचित लाभ की मांग करते हैं। नवादा के इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निगरानी विभाग की कार्रवाई और अदालत का रुख भ्रष्टाचार के प्रति पूरी तरह से सख्त है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
