नागौर: भाजपा विधायक पर 8 करोड़ की सरकारी जमीन हड़पने का आरोप, बिजली-पानी की भी अवैध व्यवस्था

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सरकारी जमीन पर कब्जे का गंभीर मामला
राजस्थान के नागौर जिले के खींवसर से भाजपा विधायक रेवंत राम डांगा एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। उन पर और उनके परिवार पर अपने पैतृक गांव पालड़ी व्यासा में करीब 205 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का गंभीर आरोप लगा है। बाजार में इस जमीन की अनुमानित कीमत 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, इस जमीन के चारों ओर पक्की दीवारें बनाकर इसे निजी उपयोग में लिया जा रहा है।
आरोप है कि विधायक ने सरकारी भूमि के बड़े हिस्से पर न केवल खेती की है, बल्कि वहां पानी की डिग्गियां और कृषि कार्यों के लिए हॉल का निर्माण भी कर लिया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, खसरा संख्या 132 और अन्य सरकारी भूखंडों पर किए गए इस निर्माण को लेकर स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कृषि विस्तार विभाग के अधिकारियों ने इस मामले में अनभिज्ञता जताई है, जबकि मौके पर सरकारी अनुदान वाली योजनाओं का लाभ भी निजी तौर पर लिए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
बिजली और पानी की अवैध चोरी
जमीन के कब्जे के साथ-साथ बिजली और पानी की चोरी का मामला भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी ट्यूबवेल से पाइपलाइन बिछाकर पानी को सीधे विधायक के खेतों और डिग्गियों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा, बिजली के लिए किसी वैध कनेक्शन के बजाय मुख्य लाइन से सीधे तार खींचकर सप्लाई ली जा रही है। सिंचाई के दौरान फसलों को पानी देने के लिए अवैध रूप से छोटे ट्रांसफार्मर (ढोलकी) का उपयोग किए जाने की बात भी सामने आई है, जो सीधे तौर पर बिजली विभाग के नियमों का उल्लंघन है।
डिस्कॉम नागौर के अधिकारियों ने इस पर संज्ञान लेते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया है। एसई सुल्तान सिंह ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और एईएन के साथ मिलकर उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, मौके पर मौजूद बुनियादी ढांचे को देखकर यह स्पष्ट होता है कि यह व्यवस्था लंबे समय से चल रही है, जिसमें सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
विधायक का पक्ष और विवाद की पृष्ठभूमि
जब इस पूरे मामले पर भाजपा विधायक रेवंत राम डांगा से संपर्क किया गया, तो उन्होंने आरोपों को खारिज करने के बजाय एक अलग रुख अपनाया। उन्होंने मीडिया से कहा कि वे एक बार गांव आ जाएं, वहां उन्हें सब कुछ दिखा दिया जाएगा और पूरी जानकारी दे दी जाएगी। हालांकि, इसके तुरंत बाद उन्होंने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया, जिससे मामले पर उनकी विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
यह पहली बार नहीं है जब राजस्थान में किसी जनप्रतिनिधि पर सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोप लगे हैं। इससे पहले भी भीलवाड़ा के शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा पर गौशाला के नाम पर चारागाह जमीन पर कब्जा करने का आरोप लग चुका है। इन घटनाओं ने राज्य में सरकारी भूमि के संरक्षण और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
प्रशासनिक कार्रवाई की प्रतीक्षा
वर्तमान में, स्थानीय ग्रामीण और प्रशासन इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। खसरा नंबर 54 और 55 के आसपास की जमीन पर हुए कब्जे और सरकारी खसरे की भूमि पर निजी निर्माण को लेकर अब राजस्व विभाग की रिपोर्ट का इंतजार है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो विधायक और उनके परिजनों पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अवैध अतिक्रमण के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच करता है या यह मामला केवल राजनीतिक बयानों तक सीमित रह जाता है। फिलहाल, नागौर के इस गांव में सरकारी जमीन पर बनी दीवारें और अवैध बिजली कनेक्शन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहे हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
