मूंग खरीदी पर केंद्र-राज्य के बीच खींचतान: किसानों का प्रदर्शन जारी, सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान
MP government seeks quota shift for moong procurement from Shivraj Singh Chouhan. एमपी की राजधानी भोपाल के आसपास के जिलों से मूंग उत्पादक किसान सरकारी खरीदी न होने से नाराज होकर आंदोलित हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से किसान पैदल भोपाल पहुंचे और राजधानी में सीएम हाउस तक आंदोलन कर सरकार से मूंग की सौ फीसदी खरीदी कराने की मांग कर रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीद को लेकर किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे किसान अपनी उपज की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर डटे हुए हैं। इस पूरे मामले ने अब केंद्र और राज्य सरकार के बीच एक बड़े 'लेटर वॉर' का रूप ले लिया है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
कोटा बढ़ाने को लेकर केंद्र और राज्य आमने-सामने
राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मूंग खरीद का कोटा 25 फीसदी से बढ़ाकर 40 फीसदी करने का आग्रह किया है। राज्य का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में मूंग का सबसे बड़ा उत्पादक और खरीदार है, इसलिए अन्य राज्यों का बचा हुआ कोटा मध्य प्रदेश को आवंटित किया जाना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस मांग पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि राज्य पहले अपने वर्तमान कोटे की खरीद पूरी करे, उसके बाद ही वृद्धि पर विचार किया जाएगा।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 16 जुलाई तक मध्य प्रदेश को मिले कोटे की मात्र दो फीसदी मूंग ही खरीदी गई थी। केंद्र का स्पष्ट कहना है कि जब तक निर्धारित लक्ष्य की खरीद पूरी नहीं होती, तब तक नया कोटा जारी करना संभव नहीं है। इस स्थिति ने राज्य सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी कर दी है।
सरकारी खजाने पर पड़ रहा भारी वित्तीय बोझ
दस्तावेजों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में निर्धारित लक्ष्य से अधिक मूंग की खरीद के कारण राज्य सरकार को लगभग 3,346 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। यह नुकसान औसतन 1,115 करोड़ रुपये प्रति वर्ष बैठता है। कोटे से अधिक खरीद करने पर परिवहन, भंडारण और बाजार में बिक्री के दौरान होने वाले खर्च का भार पूरी तरह से राज्य सरकार पर पड़ता है, जो राज्य के बजट के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
तुलनात्मक आंकड़ों पर गौर करें तो मध्य प्रदेश में हर साल उत्पादन का 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। इसके विपरीत राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह खरीद बहुत कम या नगण्य रही है। वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश ने 3.51 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 4.20 लाख मीट्रिक टन मूंग की खरीद की, जो राज्य की सक्रियता को दर्शाता है।
समाधान की तलाश में जारी है मंथन
किसानों की प्रमुख मांगों में ई-टोकन सिस्टम को रद्द करना और मूंग की शत-प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करना शामिल है। भोपाल में चल रहे इस आंदोलन को समाप्त करने के लिए मंत्रालय स्तर पर मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की किसानों के 15 प्रतिनिधियों के साथ बैठकें हो रही हैं। हालांकि, अब तक हुई वार्ताएं बेनतीजा रही हैं, जिससे किसानों में मायूसी है।
फिलहाल, राज्य सरकार केंद्र से कोटा शिफ्टिंग की अनुमति मिलने की उम्मीद लगाए बैठी है, जबकि किसान अपनी उपज के उचित मूल्य और सरकारी खरीद की गारंटी चाहते हैं। केंद्र और राज्य के बीच चल रहे इस गतिरोध का सीधा असर प्रदेश के उन हजारों किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी आर्थिक स्थिति मूंग की बिक्री पर निर्भर है। आने वाले दिनों में सरकार क्या ठोस कदम उठाती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
