मंदसौर: रिहायशी इलाके में निकला मगरमच्छ, ग्रामीणों ने खुद रेस्क्यू कर नदी में छोड़ा
मंदसौर नाहरगढ़ थाना क्षेत्र के रतन पिपलिया गांव में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे एक मगरमच्छ का बच्चा रिहायशी इलाके में पहुंच गया। करीब 3 से 4 फीट लंबे मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

मोहम्मद नवेद
एडिटर

रतन पिपलिया गांव में मचा हड़कंप
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के नाहरगढ़ थाना क्षेत्र स्थित रतन पिपलिया गांव में उस समय अफरातफरी मच गई, जब एक रिहायशी इलाके में मगरमच्छ का बच्चा घुस आया। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे ग्रामीणों ने इस जीव को आबादी वाले क्षेत्र में घूमते हुए देखा। करीब 3 से 4 फीट लंबे मगरमच्छ को देखकर स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई और देखते ही देखते वहां भारी भीड़ जमा हो गई।
ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए मगरमच्छ को नुकसान पहुंचाए बिना उसे काबू करने का निर्णय लिया। रस्सी की मदद से ग्रामीणों ने बड़ी सावधानी से मगरमच्छ को बांधा और सुरक्षित तरीके से उसे पास की शिवना नदी में ले जाकर छोड़ दिया। इस पूरी घटना के दौरान गांव के लोगों ने काफी सतर्कता बरती, जिससे किसी भी प्रकार की जनहानि या जीव को चोट नहीं पहुंची।
वन विभाग की सलाह और सुरक्षा मानक
इस घटना के बाद जिला वन अधिकारी संजय रायखेरे ने बताया कि मगरमच्छ का रेस्क्यू करना एक जोखिम भरा काम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन विभाग की प्रशिक्षित टीम हमेशा विशेष उपकरणों का उपयोग करती है। रेस्क्यू के दौरान सबसे पहले मगरमच्छ को चारों तरफ से घेरा जाता है और विशेष स्टिक की मदद से उसकी गर्दन को नियंत्रित किया जाता है ताकि वह हमला न कर सके।
अधिकारी ने आगे बताया कि गर्दन नियंत्रित करने के बाद मगरमच्छ के मुंह को मजबूत रस्सी से बांधा जाता है और शरीर के अन्य हिस्सों को सुरक्षित तरीके से काबू में किया जाता है। इसके बाद ही उसे रेस्क्यू वाहन में रखकर किसी सुरक्षित जलस्रोत या नदी में छोड़ा जाता है। उन्होंने ग्रामीणों को सलाह दी कि वे खुद जोखिम लेने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
बारिश के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, मंदसौर जिले के मल्हारगढ़, नारायणगढ़ और नाहरगढ़ जैसे क्षेत्रों में नदियों और नालों का जाल बिछा हुआ है। मानसून के दौरान जब जलस्तर बढ़ता है, तो अक्सर मगरमच्छ बहकर आबादी वाले इलाकों के करीब पहुंच जाते हैं। इस दौरान ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
वन विभाग का मानना है कि यदि स्थिति आपातकालीन हो और मगरमच्छ का आकार छोटा हो, तो ग्रामीणों द्वारा की गई पहल सराहनीय है। हालांकि, किसी भी वन्यजीव के साथ सीधे संपर्क में आना खतरनाक हो सकता है। इसलिए, प्रशिक्षित टीम का मौके पर पहुंचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
फिलहाल, रतन पिपलिया गांव में स्थिति सामान्य है और मगरमच्छ को नदी में छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। वन विभाग ने स्थानीय निवासियों से अपील की है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई घटना फिर से होती है, तो वे तुरंत वन विभाग के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!