मध्य प्रदेश में युवाओं के सपनों को झटका: दीनदयाल योजना के तहत 138 आवेदन खारिज, लोन वितरण में भारी कमी
Madhya Pradesh DJAY scheme loan application rejection crisis latest update. आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के नारों के बीच मध्य प्रदेश के युवाओं के रोजगार मांगने की जमीनी हकीकत संसद के पटल पर बेनकाब हो गई है। काम की तलाश और अपना उद्यम शुरू करने की यह तड़प राज्य में बेरोजगारी की भयावह स्थिति को दर्शाती है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के दावों के बीच राज्य के युवाओं की रोजगार पाने की हकीकत संसद में पेश आंकड़ों से सामने आई है। दीनदयाल जन आजीविका योजना-शहरी (DJAY-S) के तहत जब 13 राज्यों के 25 शहरों में पायलट प्रोजेक्ट के लिए आवेदन मांगे गए, तो मध्य प्रदेश के युवाओं ने सबसे अधिक रुचि दिखाई। हालांकि, सरकारी फाइलों और बैंकिंग प्रणाली की जटिलताओं ने इन युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
मध्य प्रदेश से कुल 284 युवाओं ने अपना छोटा उद्यम शुरू करने के लिए लोन हेतु आवेदन किया था। इनमें बड़ी संख्या में गिग वर्कर्स, वाहन चालक, निर्माण श्रमिक और स्वच्छता कर्मी शामिल थे, जो अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन युवाओं ने कुल 15.83 करोड़ रुपये के ऋण की मांग की थी, लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उन्हें मिली सहायता ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई है।
मांग 15.83 करोड़, मिला केवल 84 लाख
बैंकों की बेरुखी का आलम यह रहा कि 284 आवेदनों में से केवल 123 आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी। स्वीकृत राशि के रूप में युवाओं को कुल मांग का महज 5.3% हिस्सा यानी 84.1 लाख रुपये ही प्राप्त हुए। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 138 आवेदनों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया। यह अस्वीकृति दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है, जो राज्य के बैंकिंग और प्रशासनिक तंत्र की विफलता को दर्शाती है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो गुजरात ने 11.06 करोड़ रुपये की मांग के मुकाबले 1.31 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया और 96 आवेदनों को सफल बनाया। वहीं, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी केवल 35 आवेदन ही खारिज हुए थे। मध्य प्रदेश में 138 आवेदनों का रिजेक्ट होना यह बताता है कि युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने की प्रक्रिया में बड़ी बाधाएं मौजूद हैं।
पीएमईजीपी सब्सिडी में भी भारी कटौती
केवल दीनदयाल योजना ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की प्रमुख प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) में भी मध्य प्रदेश को बड़ा झटका लगा है। संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 में राज्य को 209.58 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी मिली थी, जो 2025-26 तक घटकर मात्र 84.29 करोड़ रुपये रह गई है। पांच वर्षों में सब्सिडी का आधा से भी कम हो जाना राज्य में नए स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए सरकारी समर्थन में आई कमी को स्पष्ट करता है।
इसके विपरीत, महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में सब्सिडी का आंकड़ा बढ़कर 142.31 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह अंतर दर्शाता है कि मध्य प्रदेश में युवाओं के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
योजना का उद्देश्य और चुनौतियां
दीनदयाल जन आजीविका योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी गरीबों को केंद्र और राज्य की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना है। इसमें सोशल इकोनॉमिक प्रोफाइलिंग, स्व-सहायता समूहों का गठन और व्यक्तिगत स्तर पर 4 लाख रुपये तक के लोन की सुविधा शामिल है। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आश्रय स्थल और डे-केयर सेंटर जैसे बुनियादी ढांचे का विकास भी इसका हिस्सा है।
योजना के तहत स्व-सहायता समूहों को 25 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता और एरिया लेवल फेडरेशन को 2 लाख रुपये तक देने का प्रावधान है। हालांकि, धरातल पर इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए युवाओं को बैंकों के कड़े नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जूझना पड़ रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता का सपना अधूरा रह जाता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
