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मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी: अब बच्चों को मिलेगा समान कानूनी दर्जा

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की आज जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में होने वाली बैठक में दो बड़े सुधारों पर फैसला हो सकता है। कैबिनेट के सामने रखे जा रहे समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के ड्राफ्ट में अवैध बच्चा या नाजायज औलाद जैसी कानूनी अवधारणा समाप्त कर सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा देने का प्रस्ताव है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी: अब बच्चों को मिलेगा समान कानूनी दर्जा
मूल स्रोत

जगदीशपुर में कैबिनेट की अहम बैठक: बड़े सुधारों पर मंथन

मध्यप्रदेश सरकार आज जगदीशपुर (पूर्व में इस्लामनगर) के चमन महल में एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक आयोजित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में प्रदेश के भविष्य और सामाजिक ढांचे से जुड़े कई बड़े फैसलों पर मुहर लग सकती है। इस बैठक का मुख्य आकर्षण समान नागरिक संहिता (UCC) का ड्राफ्ट और राज्य की मेडिकल शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन है।

यूसीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट में सबसे बड़ा बदलाव 'नाजायज औलाद' या 'अवैध बच्चा' जैसी कानूनी शब्दावली को समाप्त करने का है। सरकार का उद्देश्य सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा प्रदान करना है, ताकि सामाजिक भेदभाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को अधिक पारदर्शी और कानूनी दायरे में लाने की तैयारी है।

विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए नए नियम

प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह वैध माना जाएगा। विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा, हालांकि पंजीकरण न होने पर विवाह को पूरी तरह अमान्य नहीं ठहराया जाएगा। यदि पति विवाह के समय किसी अन्य महिला को गर्भवती करता है, तो पत्नी को विवाह निरस्त कराने का कानूनी अधिकार मिलेगा। साथ ही, मुस्लिम तलाक या सामाजिक पंचायतों के माध्यम से होने वाली गैर-कानूनी तलाक व्यवस्था को मान्यता नहीं दी जाएगी।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त नियम प्रस्तावित हैं। जोड़ों को एक महीने के भीतर अपने संबंधों का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें जुर्माने या जेल का सामना करना पड़ सकता है। पंजीकरण के बाद यदि संबंध टूटते हैं, तो महिला पार्टनर को पत्नी के समान भरण-पोषण का अधिकार प्राप्त होगा। पहले से विवाहित या पंजीकृत लिव-इन में रहने वाले व्यक्ति नया पंजीकरण नहीं करा सकेंगे।

यूसीसी के इस मसौदे से अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय को बाहर रखा गया है, ताकि उनकी पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों का संरक्षण किया जा सके। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद इसे आगामी विधानसभा सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा।

मेडिकल यूनिवर्सिटी का होगा पुनर्गठन

कैबिनेट बैठक में राज्य की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। वर्तमान में एक ही विश्वविद्यालय पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन रहेंगे।

वहीं, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन सहित मध्य और पश्चिम मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज उज्जैन स्थित नई मेडिकल यूनिवर्सिटी के दायरे में आएंगे। इस पुनर्गठन से शैक्षणिक प्रशासन और परीक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने इस बैठक और 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र की तैयारियों की समीक्षा कर ली है। सरकार का मानना है कि ये सुधार न केवल प्रशासनिक कार्यकुशलता बढ़ाएंगे, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों को भी सशक्त करेंगे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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