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मध्य प्रदेश में 'एनालॉग पनीर' पर प्रतिबंध की तैयारी, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए संकेत

दूध से बने पनीर की जगह कम लागत वाले एनालॉग पनीर के इस्तेमाल को लेकर मध्यप्रदेश सरकार सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने मंगलवार को इंदौर में कहा कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor In Chief

12 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
मध्य प्रदेश में 'एनालॉग पनीर' पर प्रतिबंध की तैयारी, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए संकेत
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मध्य प्रदेश सरकार राज्य में खाद्य सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। राज्य के स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने हाल ही में इंदौर में संकेत दिए हैं कि प्रदेश में 'एनालॉग पनीर' की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। यह निर्णय होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय में बढ़ते एनालॉग पनीर के इस्तेमाल को देखते हुए लिया जा रहा है।

क्या है एनालॉग पनीर और क्यों है चिंता का विषय?

एनालॉग पनीर देखने और स्वाद में काफी हद तक असली दूध से बने पनीर जैसा ही होता है, लेकिन इसकी निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह अलग है। इसे तैयार करने में दूध के स्थान पर वेजिटेबल ऑयल, फैट, स्टार्च और प्लांट प्रोटीन जैसे गैर-डेयरी घटकों का उपयोग किया जाता है। चूंकि इसका पोषण प्रोफाइल पारंपरिक डेयरी पनीर से बिल्कुल भिन्न होता है, इसलिए इसे स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से एक अलग श्रेणी में रखा जाता है।

बाजार में एनालॉग पनीर की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी कम लागत है। होटल और रेस्टोरेंट संचालक अपनी लागत कम करने के लिए अक्सर इसका उपयोग करते हैं। समस्या तब उत्पन्न होती है जब ग्राहकों को यह पता नहीं होता कि वे जो पनीर खा रहे हैं, वह असली है या एनालॉग। यह स्थिति सीधे तौर पर उपभोक्ता के अधिकारों और उनकी जानकारी के अधिकार का उल्लंघन है।

उपभोक्ता की जानकारी और खाद्य सुरक्षा नियम

खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार, किसी भी उत्पाद को उसके सही नाम और सामग्री के साथ लेबल करना अनिवार्य है। एनालॉग पनीर को डेयरी उत्पाद के रूप में नहीं बेचा जा सकता। यदि किसी खाद्य पदार्थ में इसका उपयोग किया जा रहा है, तो उपभोक्ता को इसकी स्पष्ट जानकारी मिलना आवश्यक है ताकि वे अपनी पसंद के अनुसार निर्णय ले सकें। सरकार अब इसी दिशा में कड़े नियम लागू करने पर विचार कर रही है।

राज्य सरकार का मानना है कि आम उपभोक्ता के लिए असली और एनालॉग पनीर के बीच अंतर करना लगभग असंभव है। दोनों की शक्ल और उपयोग समान होने के कारण, मिलावटखोर इसका फायदा उठाते हैं। इस भ्रामक स्थिति को खत्म करने के लिए ही प्रदेश सरकार ने प्रतिबंध लगाने का मन बनाया है।

मिलावट के खिलाफ जारी है अभियान

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब मध्य प्रदेश का खाद्य एवं औषधि प्रशासन पूरे राज्य में दूध और दूध से बने उत्पादों में मिलावट के खिलाफ सघन अभियान चला रहा है। हाल ही में भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों से घी के नमूनों की जांच में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं, जहाँ बड़ी संख्या में नमूने असुरक्षित पाए गए हैं।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। एनालॉग पनीर पर प्रस्तावित प्रतिबंध इसी व्यापक अभियान का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आम जनता को शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। आने वाले दिनों में सरकार इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

फिलहाल, होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। यदि प्रतिबंध लागू होता है, तो व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को अपने मेनू और सामग्री के उपयोग में पारदर्शिता बरतनी होगी। सरकार की इस सख्ती से बाजार में बिकने वाले डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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