मध्य प्रदेश की सड़कों पर हर दिन 40 लोगों की मौत, सड़क हादसों में देश में तीसरे स्थान पर राज्य
Madhya Pradesh road accident death toll crisis analysis and India state safety report update. सड़क पर रफ्तार का खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश की सड़कों पर हर रोज औसतन 142 एक्सीडेंट हो रहे हैं और रोजाना करीब 40 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मध्य प्रदेश की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और उनमें जान गंवाने वाले लोगों के आंकड़ों ने एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत ताजा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में हर दिन औसतन 142 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना करीब 40 लोगों की मौत हो रही है। यह भयावह स्थिति देश में सड़क सुरक्षा के दावों पर सवालिया निशान लगा रही है।
हादसों में कमी, लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़ा
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो एक अजीब विरोधाभास सामने आता है। वर्ष 2025 में सड़क हादसों की संख्या में कमी दर्ज की गई है, जहां कुल 52,125 दुर्घटनाएं हुईं, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 56,669 था। हालांकि, हादसों की संख्या कम होने के बावजूद मौतों का ग्राफ ऊपर गया है। वर्ष 2025 में राज्य में 14,842 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं पहले की तुलना में अधिक जानलेवा साबित हो रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर तुलना करें तो तमिलनाडु सड़क हादसों के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है। वहीं, उत्तर प्रदेश में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक है, जहां रोजाना औसतन 136 हादसे होते हैं, लेकिन मौतों की संख्या 75 प्रतिदिन है। मध्य प्रदेश इस सूची में तीसरे स्थान पर है, जो राज्य में सड़क सुरक्षा प्रबंधन की खामियों को उजागर करता है।
सरकार का 4E एक्शन प्लान
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें '4E' रणनीति पर काम कर रही हैं। इसमें एजुकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (अभियांत्रिकी), इन्फोर्समेंट (प्रवर्तन) और इमरजेंसी केयर (आपातकालीन देखभाल) शामिल हैं। सरकार ड्राइविंग ट्रेनिंग संस्थानों के माध्यम से जागरूकता फैला रही है और नेशनल हाईवे पर ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है।
वाहनों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कारों में एयरबैग, एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग और सीटबेल्ट रिमाइंडर जैसे फीचर्स अनिवार्य कर दिए हैं। साथ ही, भारत NCAP क्रैश टेस्ट रेटिंग के जरिए वाहनों की सुरक्षा को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर ई-चालान और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी को भी सख्त किया गया है।
पीड़ितों के लिए राहत और मुआवजा
दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मदद पहुंचाने के लिए सरकार ने 'राह-वीर' (गुड समैरिटन) योजना के तहत प्रोत्साहन राशि को 5,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया है। इसके अलावा, हिट एंड रन के मामलों में मुआवजे की राशि में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। गंभीर चोट लगने पर अब 50,000 रुपये और मृत्यु होने पर 2,00,000 रुपये का मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।
आपातकालीन स्थिति में गोल्डन आवर के दौरान पीड़ितों को कैशलेस इलाज मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री राहत योजना भी शुरू की गई है। इन तमाम प्रयासों के बावजूद, सड़कों पर बढ़ती मौतों का आंकड़ा यह संकेत देता है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा मानकों के पालन और सड़क अनुशासन को लेकर अभी और अधिक सख्ती की आवश्यकता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
