मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती: 42 जिलों में औसत से कम बारिश, अगले 4 दिन राहत के आसार
मध्य प्रदेश में जून के बाद जुलाई में भी मानसून पिछड़ गया है। प्रदेश में 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, खरगोन के गोगावां में सबसे ज्यादा 7.6 इंच पानी गिरा।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मानसून की कमी से जूझ रहा मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश में मानसून का प्रदर्शन इस साल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। जून के बाद जुलाई में भी बारिश का आंकड़ा संतोषजनक नहीं रहा, जिसके चलते प्रदेश में अब तक औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। राज्य के 55 में से 42 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम पानी गिरा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 15.4 इंच बारिश हुई है, जबकि सामान्य तौर पर इस समय तक 17.6 इंच बारिश हो जानी चाहिए थी।
पश्चिमी हिस्सों में दिखा असर, जनजीवन प्रभावित
पिछले 48 घंटों के दौरान मालवा-निमाड़ क्षेत्र, विशेषकर इंदौर और उज्जैन संभाग में भारी बारिश का दौर देखा गया। खरगोन, बड़वानी, खंडवा और रतलाम जैसे जिलों में मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए। खरगोन के गोगावां में 7.6 इंच बारिश दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक है। बड़वानी के सेंधवा में जलभराव के कारण कई घरों में पानी घुस गया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। खंडवा में तेज बारिश और हवाओं के कारण कपास और मक्का की फसलें खेतों में बिछ गईं, जिससे किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ा है।
बचाव कार्यों की बात करें तो खंडवा में आबना और सुक्ता नदी के तेज बहाव के बीच टापू पर फंसे चार लोगों को SDRF की टीम ने करीब साढ़े दस घंटे के कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। जिला प्रशासन ने नदी-नालों के पास रहने वाले निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
अगले चार दिनों तक बारिश में कमी की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय रहे तीन मजबूत सिस्टम अब कमजोर पड़ रहे हैं। इस कारण अगले चार दिनों तक भारी बारिश की संभावना कम है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगस्त के दौरान मानसून की गतिविधियां फिर से जोर पकड़ सकती हैं, जिससे बारिश की कमी को पूरा करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल, राज्य के पूर्वी हिस्से में 15 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में 11 प्रतिशत की कमी बनी हुई है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में अगस्त के महीने में ऐतिहासिक रूप से भारी बारिश का रिकॉर्ड रहा है। उदाहरण के तौर पर, जबलपुर में 1923 में अगस्त के दौरान 44 इंच बारिश दर्ज की गई थी। मौसम विभाग के अनुसार, इन बड़े शहरों में अगस्त के दौरान औसतन 10 से 18 इंच तक बारिश होती है। इस वर्ष की स्थिति को देखते हुए, आगामी हफ्तों में होने वाली बारिश पर ही कृषि और जल स्तर का भविष्य निर्भर करेगा।
वर्तमान में जिन 42 जिलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है, उनमें भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सागर, रीवा, और उज्जैन जैसे प्रमुख जिले शामिल हैं। वहीं, 13 जिले ऐसे हैं जहां औसत से अधिक बारिश हुई है, जिनमें इंदौर, खंडवा, खरगोन और बड़वानी प्रमुख हैं। प्रशासन ने जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!