कुरुक्षेत्र: मीरी-पीरी अस्पताल में वेतन का संकट गहराया, 5 अगस्त से ओपीडी ठप करने की चेतावनी
कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद में मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में वेतन विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पिछले महीने 27 जुलाई को आंदोलन खत्म करने वाला स्टाफ अब महज 9 दिन बाद फिर से धरने की तैयारी में हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

चार महीने से वेतन न मिलने से कर्मचारियों में भारी रोष
कुरुक्षेत्र जिले के शाहाबाद स्थित मीरी-पीरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में एक बार फिर से वेतन को लेकर विवाद गहरा गया है। अस्पताल के करीब 362 कर्मचारी पिछले चार महीनों से वेतन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। कर्मचारियों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी लंबित मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 5 अगस्त से अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह से बंद कर देंगे।
इससे पहले 27 जुलाई को कर्मचारियों ने अपना आंदोलन समाप्त किया था, लेकिन आश्वासन के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। अब महज नौ दिन बाद ही कर्मचारी फिर से धरने पर बैठने की तैयारी कर रहे हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर फिर से प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
प्रबंधन और टेकओवर को लेकर उलझा मामला
संस्थान के प्रबंधन को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (HSGMC) के बीच खींचतान जारी है। 27 जुलाई को जब HSGMC ने संस्थान का टेकओवर करने की प्रक्रिया शुरू की थी, तब कर्मचारियों को वेतन भुगतान का भरोसा दिलाया गया था। हालांकि, उसी दिन पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से स्टे मिलने के बाद स्थिति फिर से जटिल हो गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस बात से मतलब नहीं है कि संस्थान का संचालन कौन कर रहा है, उनकी प्राथमिकता केवल उनका लंबित वेतन है। उन्होंने SGPC के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी को पत्र लिखकर अपनी व्यथा साझा की है और मांग की है कि संस्थान के अधिकार क्षेत्र में आने के बाद उनकी बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
अधिकार और दावों के बीच फंसा भविष्य
संस्थान के टेकओवर को लेकर दोनों कमेटियों के अपने-अपने दावे हैं। SGPC के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने HSGMC को कोई चार्ज नहीं सौंपा है, इसलिए टेकओवर का दावा पूरी तरह से निराधार है। वहीं, दूसरी ओर HSGMC का तर्क है कि उन्होंने 72 घंटे का अल्टीमेटम देने के बाद कानूनी प्रक्रियाओं और प्रशासन की मदद से कार्यभार संभाला था।
इस कानूनी और प्रशासनिक खींचतान के बीच अस्पताल का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि 4 अगस्त तक उन्हें वेतन के संबंध में कोई लिखित आश्वासन या समाधान नहीं मिलता है, तो वे 5 अगस्त से काम बंद कर देंगे। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, अस्पताल प्रशासन और संबंधित कमेटियों की ओर से इस संकट को टालने के लिए कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी इस मामले में महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि ओपीडी बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
