किशनगंज: साइबर ठगी का शिकार हुए व्यक्ति को मिली बड़ी राहत, पुलिस ने वापस कराए 50 हजार रुपये
Kishanganj cyber police swift action refunds 50k fraud money. पुलिस के तकनीकी प्रयासों से ठगी का शिकार हुए व्यक्ति के खाते से निकाली गई 50 हजार रुपए की राशि सफलतापूर्वक वापस कराई गई।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के किशनगंज जिले में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक पीड़ित के खाते से उड़ाए गए 50 हजार रुपये की राशि को सफलतापूर्वक वापस रिकवर कर लिया है। पुलिस की इस तत्परता से पीड़ित को बड़ी राहत मिली है और साइबर अपराधियों के मंसूबों पर पानी फिर गया है।
शिकायत मिलते ही हरकत में आई पुलिस
घटना की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित ने साइबर थाना किशनगंज में अपने साथ हुई धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत दर्ज होते ही साइबर सेल की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और तकनीकी जांच शुरू कर दी। पुलिस ने संबंधित बैंक और डिजिटल पेमेंट गेटवे के साथ समन्वय स्थापित किया, जिससे ठगी गई राशि को ट्रैक करना संभव हो सका।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगों ने पीड़ित के खाते से 50 हजार रुपये की अवैध निकासी की थी। तकनीकी टीम ने समय रहते कार्रवाई करते हुए उस राशि को फ्रीज कराया और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उसे पीड़ित के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करवा दिया।
समय पर सूचना का महत्व
किशनगंज पुलिस ने इस मामले के जरिए आम जनता को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध की स्थिति में 'गोल्डन ऑवर' का बहुत महत्व होता है। यदि पीड़ित व्यक्ति ठगी होने के तुरंत बाद पुलिस को सूचना देता है, तो राशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। देरी होने पर अपराधी राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे उसे ट्रैक करना कठिन हो जाता है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी होने पर घबराने के बजाय तुरंत आधिकारिक साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी घटना की विस्तृत जानकारी दर्ज कराई जा सकती है।
सावधानी ही बचाव का एकमात्र रास्ता
साइबर पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता विवरण, एटीएम कार्ड, ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। अक्सर अपराधी बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और लालच या डर दिखाकर जानकारी हासिल कर लेते हैं।
इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें। कई बार ये लिंक फिशिंग का जरिया होते हैं, जो आपके फोन का डेटा और बैंकिंग एक्सेस चुरा सकते हैं। किसी भी ऑनलाइन ऑफर या लॉटरी के झांसे में न आएं, क्योंकि ये ठगी के सबसे आम तरीके हैं।
किशनगंज पुलिस की इस कार्रवाई की स्थानीय स्तर पर सराहना की जा रही है। इस तरह के मामलों में त्वरित रिकवरी से आम लोगों का पुलिस और साइबर सुरक्षा तंत्र पर भरोसा बढ़ा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
