खरगोन में 13 दिन के सूखे के बाद बरसे बदरा, खरीफ फसलों में लौटी जान
Khargone rain brings relief to farmers, boosts chilli, cotton, and soybean crops. खरगोन में मंगलवार को 13 दिन के अंतराल के बाद रिमझिम बारिश हुई। इस बारिश से सोयाबीन, मिर्च, मक्का और कपास जैसी खरीफ फसलों को जीवनदान मिला है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

लंबे इंतजार के बाद बारिश से किसानों को मिली बड़ी राहत
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए मंगलवार का दिन राहत लेकर आया। पिछले 13 दिनों से जिले में बारिश का दौर थमा हुआ था, जिससे फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। हालांकि, मंगलवार सुबह 11:30 बजे से शुरू हुई रिमझिम फुहारों ने दोपहर 2 बजे तक पूरे क्षेत्र को तरबतर कर दिया। इस बारिश से न केवल किसानों के चेहरे खिल उठे, बल्कि फसलों को भी नया जीवनदान मिला है।
बारिश का यह दौर केवल खरगोन शहर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले के भगवानपुरा और झिरनिया जैसे ग्रामीण अंचलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव का सीधा असर तापमान पर भी देखने को मिला है। पिछले 24 घंटों के भीतर तापमान में करीब 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भीषण गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों को काफी राहत मिली है।
फसलों की सेहत में होगा सुधार
कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों के अनुसार, यह बारिश खरीफ की मुख्य फसलों के लिए संजीवनी साबित होगी। सोयाबीन, कपास, मक्का और मिर्च की फसलों को इस समय पानी की सख्त आवश्यकता थी। स्थानीय किसान राजेश पटेल का कहना है कि लंबे सूखे के बाद हुई यह बारिश कपास और मिर्च की फसल की बढ़वार के लिए बेहद अनुकूल है। इससे पौधों में नई जान आएगी और पैदावार की संभावनाओं में सुधार होगा।
जिले में खरीफ सीजन 2026-27 के दौरान लगभग 4 लाख हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फसलों की बुवाई की गई है। लंबे समय तक बारिश न होने से किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित थे, लेकिन अब नमी मिलने से फसलों के मुरझाने का खतरा कम हो गया है। कृषि विभाग भी इस बारिश को फसलों के विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत मान रहा है।
जिले में बारिश के आंकड़े और स्थिति
जिला भू-अभिलेख कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों पर गौर करें तो खरगोन में इस सीजन में अब तक कुल 10.2 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि से तुलना करें तो यह आंकड़ा काफी बेहतर है, क्योंकि पिछले साल अब तक केवल 8.6 इंच बारिश ही हुई थी। जिले की कुल औसत वार्षिक वर्षा का लक्ष्य 32.6 इंच है, जिसे पूरा करने की दिशा में मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
हालांकि, जिले के कई हिस्सों में अभी भी संतोषजनक बारिश की दरकार है। कृषि प्रधान जिला होने के नाते खरगोन की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मानसून पर निर्भर करती है। आने वाले दिनों में यदि बारिश का यह क्रम बना रहता है, तो खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर होने की पूरी उम्मीद है। किसान अब मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमानों पर नजरें टिकाए हुए हैं ताकि वे अपनी कृषि गतिविधियों को उसी अनुसार व्यवस्थित कर सकें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
