करनाल में साइबर ठगी: संदिग्ध ऐप के जरिए मोबाइल हैक कर खाते से उड़ाए 2.58 लाख रुपये
Karnal cyber fraud case, mobile hacked, money stolen via suspicious app. करनाल जिले में असंध के एक व्यक्ति के मोबाइल फोन में संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड कर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि साइबर ठगों ने मोबाइल को हैक कर बैंक खातों से चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के माध्यम से कुल 2 लाख 58 हजार 888 रुपए निकाल लिए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

असंध निवासी के साथ हुई बड़ी साइबर धोखाधड़ी
हरियाणा के करनाल जिले में साइबर अपराधियों ने एक व्यक्ति को अपना निशाना बनाते हुए उसके बैंक खातों से बड़ी रकम उड़ा ली है। असंध क्षेत्र के रहने वाले योगेश कुमार के मोबाइल फोन को हैक कर अज्ञात ठगों ने कुल 2 लाख 58 हजार 888 रुपये की अवैध निकासी की। इस घटना ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
पीड़ित के अनुसार, उसके मोबाइल में अचानक 'TUBI' नाम की एक संदिग्ध एप्लीकेशन अपने आप डाउनलोड हो गई थी। इसके बाद फोन में एक फर्जी अपडेट का नोटिफिकेशन आया, जिससे फोन बार-बार हैंग होने लगा। योगेश ने बताया कि यह समस्या लगातार तीन दिनों तक बनी रही, जिसके दौरान फोन का नियंत्रण उनके हाथ से बाहर हो गया था।
तीन दिनों तक मोबाइल पर रहा अपराधियों का नियंत्रण
योगेश ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि मोबाइल में आई तकनीकी खराबी के कारण उसे फोन बंद करने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ी। जब अंततः उसने फोन को दोबारा चालू किया, तो उसे अपने बैंक खातों से पैसे कटने के कई संदेश प्राप्त हुए। इन संदेशों से स्पष्ट हुआ कि पिछले तीन दिनों से उसका मोबाइल साइबर अपराधियों के रिमोट एक्सेस में था।
खातों की जांच करने पर पता चला कि ठगों ने दो अलग-अलग बैंक खातों से चार बार में कुल 2,58,888 रुपये की राशि निकाल ली है। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत अपने फोन से उस संदिग्ध एप्लीकेशन को अनइंस्टॉल किया और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर घटना की जानकारी दी।
पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ दर्ज किया केस
साइबर थाना करनाल पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी मुकेश कुमार के नेतृत्व में पुलिस की टीम अब उन बैंक खातों और ट्रांजैक्शन ट्रेल की पड़ताल कर रही है, जिनमें यह राशि ट्रांसफर की गई है।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि 'TUBI' एप्लीकेशन के माध्यम से मोबाइल का एक्सेस कैसे हासिल किया गया। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मैलवेयर लिंक या अनधिकृत ऐप के जरिए फोन का पूरा कंट्रोल हैकर्स के पास चला जाता है, जिससे वे नेट बैंकिंग और ओटीपी तक आसानी से पहुंच बना लेते हैं।
साइबर सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की सलाह
करनाल पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही प्ले स्टोर के बाहर से कोई संदिग्ध एप्लीकेशन डाउनलोड करें। यदि मोबाइल में अचानक कोई असामान्य गतिविधि दिखे, तो तुरंत फोन को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर दें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।
फिलहाल, पुलिस मामले से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। आरोपियों तक पहुंचने के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और पीड़ित को न्याय दिलाया जा सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
