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कानपुर: सरकारी नौकरी न मिलने से हताश बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बयां किया दर्द

मैंने 50 बार सरकारी नौकरी का प्रयास किया, लेकिन मैं सफल नहीं हो पा रहा था, पापा सॉरी मुझे माफ करना… अंग्रेजी में यह सुसाइड नोट लिखकर बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट ने पंखे से फंदा लगाकर जान दे दी।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 621
कानपुर: सरकारी नौकरी न मिलने से हताश बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में बयां किया दर्द
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कानपुर में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहां एक मेधावी बीटेक गोल्ड मेडलिस्ट युवक ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। मृतक की पहचान 23 वर्षीय आनंद कुमार के रूप में हुई है। आनंद ने अपने पीछे एक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उसने सरकारी नौकरी न मिल पाने के कारण उपजी हताशा और असफलता का जिक्र किया है।

50 बार प्रयास के बाद भी नहीं मिली सफलता

पुलिस को घटनास्थल से अंग्रेजी में लिखा एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें आनंद ने लिखा है कि उसने सरकारी नौकरी पाने के लिए 50 बार प्रयास किए, लेकिन हर बार उसे विफलता ही हाथ लगी। अपने पिता से माफी मांगते हुए उसने नोट में कई बार 'सॉरी' लिखा है। प्रथम दृष्टया यह मामला सरकारी नौकरी न मिलने के कारण हुए गहरे अवसाद का प्रतीत हो रहा है।

घटना का पता तब चला जब शुक्रवार दोपहर घर पर काम करने वाली नौकरानी पहुंची। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उसने पड़ोसियों और परिजनों को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां आनंद का शव पंखे से लटका हुआ मिला।

शिक्षा में था अव्वल, राज्यपाल से मिला था गोल्ड मेडल

आनंद कुमार मूल रूप से बिहार के बक्सर का रहने वाला था। उसने वर्ष 2024 में भौंती स्थित पीएसआईटी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी। अपनी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उसने स्टेट में तीसरा स्थान प्राप्त किया था। उसकी इस उपलब्धि के लिए 13 अगस्त 2024 को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उसे गोल्ड मेडल से सम्मानित किया था।

परिजनों के अनुसार, आनंद के भाई और बहन पहले से ही सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। परिवार की उम्मीदों और खुद की आकांक्षाओं के चलते वह भी सरकारी सेवा में जाना चाहता था। हालांकि, पढ़ाई में इतना होनहार होने के बावजूद जब उसे सफलता नहीं मिली, तो वह मानसिक रूप से टूट गया था।

परिवार गया था बिहार, घर पर अकेला था आनंद

घटना के समय आनंद के पिता राजकुमार और परिवार के अन्य सदस्य बिहार गए हुए थे। वे बड़े बेटे अमित की शादी तय करने के सिलसिले में वहां गए थे। आनंद को भी उनके साथ जाना था, लेकिन उसने आखिरी समय पर जाने से मना कर दिया था। परिवार को जब इस अनहोनी की सूचना मिली, तो वे तुरंत कानपुर के लिए रवाना हो गए।

गोविंद नगर थाना प्रभारी अशोक कुमार दुबे ने बताया कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना के पीछे की अन्य परिस्थितियों का स्पष्ट पता चल सके।

यह घटना युवाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सरकारी नौकरी के प्रति बढ़ते दबाव की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। एक मेधावी छात्र का इस तरह से हार मान लेना पूरे क्षेत्र में चर्चा और शोक का विषय बना हुआ है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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