कैथल: पंचायती जमीन पर कब्जे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के पूर्व विधायक भिड़े, ग्रामीणों ने की जांच की मांग
Kaithal panchayati land dispute between Congress MLA Devender Hans and BJP leader Kulwant Bajigar controversy. कैथल के गांव भूना में पंचायती जमीन पर कब्जे को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। अब इस विवाद में गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस और भाजपा के पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर आमने सामने आए गए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

कैथल के भूना गांव में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल
हरियाणा के कैथल जिले के गांव भूना में पंचायती जमीन को लेकर उपजा विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मामले में गुहला से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस और भाजपा के पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर आमने-सामने आ गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पूर्व विधायक और उनके परिजनों ने पंचायत की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जिसके विरोध में उन्होंने जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गांव भूना में पट्टेदारों के लिए आवंटित जमीन पर पूर्व विधायक का अवैध कब्जा है। उन्होंने दावा किया कि जमीन की बोली प्रक्रिया में धांधली की गई है। विधायक का आरोप है कि जिस दिन की बोली के दस्तावेज दिखाए जा रहे हैं, उस दिन गांव में कोई बोली हुई ही नहीं थी। साथ ही, उन्होंने दस्तावेजों में हेरफेर और आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल की भी बात कही है।
ग्रामीणों के गंभीर आरोप और प्रशासन से गुहार
गांव के निवासियों ने इस संबंध में एक संयुक्त शिकायत दी है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब पांच साल पहले ग्राम पंचायत ने अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को खेती के लिए जमीन आवंटित की थी। आरोप है कि हाल ही में पूर्व विधायक के बेटे साहब सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर खेतों में खड़ी फसल को ट्रैक्टर से नष्ट कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय आरोपियों के हाथों में हथियार होने के कारण वे विरोध नहीं कर सके, लेकिन अब वे न्याय के लिए लामबंद हो गए हैं।
विधायक देवेंद्र हंस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में जमीनें छीनी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जिसे भी टिकट देती है, वह जनता की जमीन पर कब्जा करने में जुट जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में ग्रामीणों के साथ खड़े हैं और पंचायत की जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पूर्व विधायक ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
वहीं, दूसरी ओर पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित हैं। बाजीगर ने दावा किया कि उनके परिवार ने नियमानुसार बोली प्रक्रिया में भाग लिया है और वे पिछले कई वर्षों से इसी प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं।
पूर्व विधायक ने चुनौती दी कि यदि आरोप लगाने वाले लोग जमीन की बोली से संबंधित रसीदें दिखा दें, तो वे अपने आरोपों को सही मान लेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं और झूठे दावों के जरिए क्षेत्र में अशांति फैलाना चाहते हैं।
प्रशासनिक जांच पर टिकी नजरें
फिलहाल, यह मामला स्थानीय प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ग्रामीणों की शिकायत और दो राजनीतिक दिग्गजों के बीच छिड़ी इस जंग के बाद अब सबकी निगाहें जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पंचायती जमीन के आवंटन और कब्जे से जुड़े दस्तावेजों की गहनता से जांच हो ताकि सच्चाई सामने आ सके और ग्रामीणों को उनका हक मिल सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
