जोधपुर: सहकारी समिति अध्यक्ष पर जानलेवा हमले के मामले में दो दोषियों को 7 साल की कैद
Jodhpur cooperative society president attack case verdict, culprits sentenced to 7 years imprisonment. जोधपुर के पांचला खुर्द ग्राम सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश पर हुए जानलेवा हमले के 10 साल पुराने मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव सिडाना ने सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी मोटाराम और भंवरू उर्फ भंवरलाल को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

10 साल पुराने मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला
जोधपुर के पांचला खुर्द ग्राम सेवा सहकारी समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब एक दशक पुराने इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव सिडाना की अदालत ने दो दोषियों को सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले ने क्षेत्र में लंबे समय से लंबित इस चर्चित मामले को एक तार्किक परिणति तक पहुँचा दिया है।
घटना 24 सितंबर 2014 की है, जब तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश अपनी मोटरसाइकिल से कहीं जा रहे थे। इस दौरान राजकीय विद्यालय के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी ने उन्हें अचानक घेर लिया। गाड़ी से पांच आरोपी नीचे उतरे और उन्होंने सुनियोजित तरीके से ओमप्रकाश पर हमला कर दिया। इस हमले में मोटाराम नामक आरोपी ने सीधे फायर किया, जिससे ओमप्रकाश गंभीर रूप से घायल हो गए।
हमले के बाद लाठियों और सरियों से की गई मारपीट
गोलीबारी के बाद हमलावरों ने क्रूरता की हदें पार कर दीं। भंवरलाल उर्फ भंवरू और उसके अन्य साथियों ने लाठियों, डंडों और लोहे के सरियों से ओमप्रकाश पर ताबड़तोड़ प्रहार किए। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावर पूरी तरह से जान लेने के इरादे से आए थे। उन्होंने ओमप्रकाश को अधमरी और खून से लथपथ हालत में छोड़कर मौके से फरार होने का प्रयास किया, क्योंकि उन्हें लगा कि पीड़ित की मौत हो चुकी है।
हमले के दौरान जब आसपास के लोग ओमप्रकाश को बचाने के लिए दौड़े, तो मुख्य आरोपी मोटाराम ने बंदूक तानकर उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। उसने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि कोई भी बीच में आया, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस धमकी के कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी आसानी से वहां से भागने में सफल रहे।
अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी और साक्ष्य
इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष बेहद मजबूती से अपना पक्ष रखा। अपर लोक अभियोजक मयंक रांकावत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और अभियोजन ने पुख्ता सबूत जुटाए थे। सुनवाई के दौरान कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिन्होंने घटनाक्रम की पुष्टि की।
गवाहों के अलावा, 38 महत्वपूर्ण दस्तावेजी सबूत अदालत के सामने पेश किए गए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद सभी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और अंतिम बहस का गहन अवलोकन किया। इसके बाद अदालत ने मोटाराम और भंवरू उर्फ भंवरलाल को दोषी करार देते हुए उन्हें सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर जुर्माना भी लगाया।
न्याय व्यवस्था में विश्वास की बहाली
10 साल तक चले इस कानूनी संघर्ष के बाद आया यह फैसला पीड़ित पक्ष के लिए एक बड़ी राहत है। इस मामले ने यह साबित कर दिया है कि कानून की प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन न्याय अंततः सुनिश्चित होता है। दोषियों को मिली यह सजा समाज में एक कड़ा संदेश भी देती है कि सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर इस तरह के जानलेवा हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
वर्तमान में, इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। स्थानीय लोगों ने अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया है और इसे कानून का शासन स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। दोषियों को अब अपनी सजा काटनी होगी, जबकि इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर भी पुलिस की पूर्व में की गई जांच को इस फैसले ने सही ठहराया है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
