जेएनयू छात्रसंघ संयुक्त सचिव दानिश अली की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
JNU Student Union Joint Secretary Danish Ali admitted to RML Hospital. Aisa claims blood sugar dropped to 46 mgdL. नई दिल्ली। जेएनयू छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली की तबीयत शनिवार को भूख हड़ताल के सातवें दिन गंभीर रूप से बिगड़ गई। छात्र संगठन आइसा के अनुसार, शाम करीब 5.30 बजे उन्हें डॉ राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

भूख हड़ताल के सातवें दिन बिगड़ी स्थिति
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ के संयुक्त सचिव दानिश अली की स्वास्थ्य स्थिति शनिवार को अचानक गंभीर हो गई। वे पिछले सात दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। स्वास्थ्य में गिरावट के बाद उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया।
छात्र संगठन आइसा (AISA) के अनुसार, दानिश अली को शाम करीब 5:30 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया। संगठन ने बताया कि लगातार उपवास के कारण उनके शरीर में ग्लूकोज का स्तर खतरनाक रूप से गिरकर 46 एमजी/डीएल तक पहुंच गया था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें तुरंत आईवी फ्लूइड (IV fluid) चढ़ाना शुरू किया ताकि उनकी स्थिति को स्थिर किया जा सके।
प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और इस्तीफे की मांग
दानिश अली को अस्पताल ले जाते समय जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी छात्रों में भारी आक्रोश देखा गया। बड़ी संख्या में छात्र वहां एकत्रित हुए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी की। छात्रों का आरोप है कि सरकार उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जिसके कारण स्थिति इतनी गंभीर हो गई है।
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
अन्य प्रदर्शनकारियों का अनशन जारी
दानिश अली के अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद, आंदोलन की आग ठंडी नहीं पड़ी है। आइसा के मुताबिक, सोनम वांगचुक सहित 20 से अधिक प्रदर्शनकारी अभी भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। इन छात्रों का स्वास्थ्य भी लगातार गिर रहा है, जिससे चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।
संगठन ने सरकार से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और छात्रों के साथ संवाद शुरू करें। आइसा ने एक बयान में कहा कि दानिश अली की बिगड़ती तबीयत इस पूरे आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती है और सरकार को अब और देरी नहीं करनी चाहिए।
आंदोलन का भविष्य और प्रशासन की चुप्पी
फिलहाल, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है और छात्रों का मनोबल कम नहीं हुआ है। अस्पताल में भर्ती दानिश अली की स्थिति पर डॉक्टरों की टीम नजर बनाए हुए है। आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
दूसरी ओर, शिक्षा मंत्रालय या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। छात्रों का कहना है कि सरकार की यह चुप्पी आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने का काम कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार छात्रों की मांगों पर चर्चा के लिए तैयार होती है या स्थिति और विकट हो जाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ानटिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
