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जहानाबाद: किसान के बेटे ने बिना कोचिंग पास की NEET परीक्षा, तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी

जहानाबाद के जाफरगंज मोहल्ले के मोहम्मद इश्तियाक आलम ने NEET-UG परीक्षा में 592 अंक हासिल कर सफलता प्राप्त की है। किसान के बेटे इश्तियाक ने यह उपलब्धि बिना किसी कोचिंग संस्थान के, घर पर सेल्फ स्टडी के दम पर तीसरे प्रयास में हासिल की।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

31 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
जहानाबाद: किसान के बेटे ने बिना कोचिंग पास की NEET परीक्षा, तीसरे प्रयास में मिली कामयाबी
मूल स्रोत

बिहार के जहानाबाद जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां एक किसान के बेटे ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर नीट (NEET-UG) जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की है। जाफरगंज मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद इश्तियाक आलम ने 592 अंक प्राप्त कर अपने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इश्तियाक की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने किसी भी महंगे कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी के जरिए यह मुकाम हासिल किया है।

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं मानी हार

इश्तियाक एक बेहद साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता मोहम्मद सगीर आलम खेती करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं। संसाधनों की कमी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इश्तियाक के पिता ने उनकी शिक्षा में कभी कोई बाधा नहीं आने दी। इश्तियाक के लिए यह सफर आसान नहीं था; उन्होंने इस परीक्षा को पास करने के लिए तीन बार प्रयास किए। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कमियों को सुधारते हुए लगातार पढ़ाई जारी रखी।

इश्तियाक के पिता मोहम्मद सगीर आलम ने साझा किया कि वे स्वयं केवल तीसरी कक्षा तक ही पढ़ पाए थे, लेकिन उन्होंने हमेशा अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का सपना देखा था। उन्होंने बताया कि अतीत में अपने पिता के इलाज के दौरान बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में उन्होंने उन्हें खो दिया था। उस दुखद घटना ने उन्हें यह संकल्प लेने पर मजबूर किया कि वे अपने बेटे को डॉक्टर बनाएंगे ताकि वह भविष्य में गरीब और जरूरतमंद लोगों का इलाज कर सके और समाज की सेवा कर सके।

सेल्फ स्टडी बनी सफलता की कुंजी

अपनी सफलता का श्रेय देते हुए इश्तियाक ने बताया कि उन्होंने पूरी तरह से सेल्फ स्टडी पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने नियमित रूप से पढ़ाई की और अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा। माता-पिता का त्याग और उनका निरंतर समर्थन ही था जिसने उन्हें कठिन समय में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इश्तियाक का मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ी सफलता प्राप्त की जा सकती है।

इश्तियाक की इस कामयाबी की खबर फैलते ही पूरे जाफरगंज मोहल्ले में जश्न का माहौल है। स्थानीय लोगों ने उनके घर पहुंचकर उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं और मिठाई खिलाकर बधाई दी। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि इश्तियाक ने उन सभी छात्रों के लिए एक मिसाल पेश की है जो आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई को लेकर निराश हो जाते हैं। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि सही दिशा में की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।

युवाओं के लिए प्रेरणा

मोहम्मद इश्तियाक आलम की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो बड़े शहरों में जाकर कोचिंग करने में असमर्थ हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि आज के डिजिटल युग में सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से घर बैठे भी कठिन से कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को पास किया जा सकता है। अब इश्तियाक के डॉक्टर बनने का सपना पूरा होने की राह प्रशस्त हो गई है, जिससे उनके परिवार में खुशी की लहर है।

इस सफलता के बाद इश्तियाक के परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। लोग उनके पिता के संघर्ष और इश्तियाक की लगन की सराहना कर रहे हैं। आने वाले समय में इश्तियाक चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और अपने पिता के उस सपने को साकार करेंगे, जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक संघर्ष किया। उनकी यह यात्रा न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे जिले के युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनी है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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