जालौन: लावारिस मिली नवजात बच्ची के परिजनों की तलाश, प्रशासन ने दी 15 दिन की मोहलत
जालौन जिले में मिली एक परित्यक्त नवजात बालिका के माता-पिता या परिजनों का पता लगाने के लिए जिला प्रशासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को बालिका के परिजनों के बारे में कोई प्रामाणिक जानकारी हो तो वह 15 दिनों के भीतर जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, कलेक्ट्रेट जालौन में उपलब्ध कराए।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

परिजनों की तलाश में जुटी जिला प्रशासन की टीम
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक लावारिस नवजात बालिका के मिलने के बाद जिला प्रशासन ने उसके माता-पिता और परिजनों की खोजबीन तेज कर दी है। जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक सूचना जारी करते हुए आम जनता से सहयोग की अपील की है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि बच्ची के कोई वैध परिजन हैं, तो उन तक बच्ची को सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
घटनाक्रम के अनुसार, यह नवजात बच्ची 30 जून 2026 को उरई कोतवाली क्षेत्र के ग्राम रगेदा में मिली थी। बच्ची के मिलने की सूचना स्थानीय पुलिस को सुबह 11:20 बजे दी गई थी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी की और मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति को दी। इसके बाद 2 जुलाई 2026 को बच्ची को बाल कल्याण समिति, जालौन के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
बाल कल्याण समिति की देखरेख में है बच्ची
वर्तमान में बच्ची को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत सुरक्षित रखा गया है। बाल कल्याण समिति के निर्देशों का पालन करते हुए उसे राजकीय विशेष दत्तक ग्रहण इकाई, जालौन में स्थानांतरित किया गया है। यहाँ विशेषज्ञों की निगरानी में बच्ची की उचित देखभाल की जा रही है और उसकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि बच्ची के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को भी बच्ची के मूल परिवार या उसके मिलने के स्थान के बारे में कोई ठोस जानकारी हो, तो वे तुरंत अधिकारियों को सूचित करें। यह जानकारी किसी भी निर्दोष बच्चे के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
15 दिन बाद शुरू होगी दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया
प्रशासन ने परिजनों के लिए 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बच्ची का माता-पिता, अभिभावक या निकटतम संबंधी होने का दावा करता है, तो उसे कलेक्ट्रेट स्थित जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय (कमरा संख्या-26) में संपर्क करना होगा। दावे के साथ संबंधित व्यक्ति को अपने दावों की पुष्टि के लिए आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों की अवधि के भीतर कोई भी वैध दावा या जानकारी प्राप्त नहीं होती है, तो प्रशासन कानूनी रूप से आगे बढ़ेगा। ऐसी स्थिति में बच्ची को दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद नियमानुसार उसे गोद देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि बच्ची को एक सुरक्षित और स्थायी परिवार मिल सके।
प्रशासन ने इस मामले में संवेदनशीलता बरतने की अपील की है। किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना फैलाने से बचने और केवल प्रामाणिक जानकारी ही प्रशासन को देने का आग्रह किया गया है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि बच्ची के मामले में हर संभव कानूनी विकल्प का उपयोग किया जाए ताकि उसे भविष्य में एक बेहतर जीवन मिल सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
