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जैसलमेर: बस एक्सीडेंट क्लेम अटकाने पर बीमा कंपनी को 22 लाख का झटका, आयोग ने सुनाया कड़ा फैसला

Jaisalmer consumer commission imposes heavy fine on United Insurance for denying accident claim. जैसलमेर जिला उपभोक्ता आयोग ने वोल्वो बस के एक्सीडेंट क्लेम को बिना वजह अटकाने पर यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी पर करीब 22 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को तुरंत क्लेम राशि 6% ब्याज के साथ चुकाने और पीड़ित को हुए मानसिक व आर्थिक नुकसान का हर्जाना देने का कड़ा आदेश दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

20 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
जैसलमेर: बस एक्सीडेंट क्लेम अटकाने पर बीमा कंपनी को 22 लाख का झटका, आयोग ने सुनाया कड़ा फैसला
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जैसलमेर जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा क्षेत्र में लापरवाही बरतने वाली एक बड़ी कंपनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को एक वोल्वो बस के दुर्घटना क्लेम को बिना किसी ठोस आधार के रोकने और उसे खारिज करने के मामले में दोषी पाया है। इस मामले में कंपनी पर कुल 22 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है, जो पीड़ित बस मालिक को चुकाना होगा।

क्या था पूरा मामला?

जैसलमेर के निवासी निर्मल पुरोहित ने अपनी वोल्वो बस का बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी से करवाया था, जिसके लिए उन्होंने एक लाख रुपये से अधिक का प्रीमियम भरा था। यह पॉलिसी वर्ष 2022-23 के लिए वैध थी। 25 जनवरी 2023 की रात को रामजी के गोल क्षेत्र में उनकी बस एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई, जब एक ट्रेलर ने खड़ी बस को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी।

हादसे के बाद बस मालिक ने बीमा कंपनी को सूचित किया और सर्वे की प्रक्रिया पूरी की। नियमानुसार सभी आवश्यक दस्तावेज और क्लेम फॉर्म कंपनी के पास जमा करा दिए गए थे। इसके बावजूद, कंपनी ने लंबे समय तक मामले को लटकाए रखा और अंततः कागजात अधूरे होने का हवाला देकर क्लेम को खारिज कर दिया। इस देरी के कारण बस मालिक न केवल आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हुए, बल्कि उन्हें मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा।

आयोग ने सेवा में कमी को माना आधार

मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पवन कुमार ओझा और सदस्य रमेश कुमार गौड़ की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि बीमा कंपनी ने जानबूझकर क्लेम को अटकाया, जो कि उपभोक्ता सेवा में स्पष्ट कमी है। आयोग ने कंपनी के तर्कों को खारिज करते हुए पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया।

आदेश के अनुसार, कंपनी को 17,82,247 रुपये की क्लेम राशि का भुगतान करना होगा। इस राशि पर शिकायत दर्ज होने की तारीख यानी 3 जुलाई 2024 से लेकर भुगतान के दिन तक 6 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा। इसके अतिरिक्त, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 4 लाख रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

समय सीमा का पालन न करने पर बढ़ेगा ब्याज

उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को इस फैसले के अनुपालन के लिए 45 दिनों की समय सीमा दी है। यदि बीमा कंपनी तय अवधि के भीतर पूरी राशि का भुगतान करने में विफल रहती है, तो उन्हें दंड स्वरूप ब्याज की दर को 6 फीसदी से बढ़ाकर 9 फीसदी करना होगा। यह फैसला बीमा कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अक्सर मामूली तकनीकी खामियों का बहाना बनाकर वैध क्लेम को खारिज कर देती हैं।

इस निर्णय से बस मालिक को बड़ी राहत मिली है, जिनकी बस दुर्घटना के बाद से ही परिचालन से बाहर थी। आयोग के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि बीमा कंपनियां ग्राहकों को परेशान करने के लिए सेवा में कमी नहीं कर सकतीं और उन्हें अपने वादों के प्रति जवाबदेह रहना होगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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