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जैसलमेर में 104 एंबुलेंस सेवा पर एनएचएम का कड़ा रुख, ऑडिट में सामने आई बड़ी खामियां

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा करवाई गई हालिया ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि जिले में स्वीकृत 13 की संख्या से काफी कम यानि केवल 8 एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। वहीं इस मामले में CMHO डॉ राजेंद्र पालीवाल का कहना है कि एक गाडी फलोदी जिले में चली गई और बाकी चार खराब हो गई थी, जिनकी जगह चार नई गाड़ियां लगा दी गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
जैसलमेर में 104 एंबुलेंस सेवा पर एनएचएम का कड़ा रुख, ऑडिट में सामने आई बड़ी खामियां
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जैसलमेर में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली

जैसलमेर जिले में गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए संचालित '104 जननी एक्सप्रेस एंबुलेंस' सेवा को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) द्वारा हाल ही में की गई एक ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि जिले में स्वीकृत 13 एंबुलेंस के मुकाबले केवल 8 गाड़ियां ही धरातल पर संचालित हो रही थीं। इस बड़ी लापरवाही के बाद एनएचएम मुख्यालय ने जैसलमेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि स्वीकृत बेड़े की तुलना में कम एंबुलेंस का संचालन होने से प्रसूताओं को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधा प्रभावित हो रही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएचएम ने सीएमएचओ को तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। विभाग ने यह जानने की कोशिश की है कि आखिर किन कारणों से स्वीकृत संख्या के अनुसार गाड़ियां सड़क पर नहीं थीं और इसके लिए जवाबदेही किसकी है।

सीएमएचओ ने दी सफाई, गाड़ियों की कमी का बताया कारण

इस पूरे मामले पर जैसलमेर के सीएमएचओ डॉ. राजेंद्र पालीवाल ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एंबुलेंस की संख्या कम होने के पीछे प्रशासनिक और तकनीकी कारण जिम्मेदार हैं। डॉ. पालीवाल के अनुसार, जिले में पहले 13 एंबुलेंस स्वीकृत थीं, लेकिन नोख सीएचसी के फलोदी जिले में शामिल होने के कारण एक एंबुलेंस वहां चली गई। इसके अलावा, चार अन्य गाड़ियां तकनीकी रूप से खराब हो गई थीं, जिन्हें सेवा से हटाना पड़ा।

सीएमएचओ ने आगे बताया कि खराब हुई चार गाड़ियों के स्थान पर वित्त विभाग के नियमों के अनुरूप नई निजी गाड़ियां तैनात कर दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि ये नई गाड़ियां जुलाई के अंतिम सप्ताह में प्राप्त हुई थीं, जिसके कारण ऑडिट के दौरान इनका डेटा सिस्टम में अपडेट नहीं हो पाया और इन्हें 'कम' की श्रेणी में दर्ज कर लिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब व्यवस्था को दुरुस्त कर दिया गया है।

योजना का उद्देश्य और भविष्य की राह

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में प्रसूताओं को अस्पताल से घर तक सुरक्षित और मुफ्त परिवहन उपलब्ध कराना है। जैसलमेर जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण जिले में इन एंबुलेंस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ऑडिट में पकड़ी गई इस कमी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भविष्य में मॉनिटरिंग और अधिक सख्त होने की संभावना है।

एनएचएम मुख्यालय ने निर्देश दिए हैं कि जिले में स्वीकृत मापदंडों के अनुसार एंबुलेंस सेवा को पूरी तरह बहाल किया जाए ताकि किसी भी मरीज को असुविधा न हो। विभाग अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि भविष्य में गाड़ियों के रखरखाव और उनके संचालन में कोई कोताही न बरती जाए। सीएमएचओ कार्यालय को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर एंबुलेंस की स्थिति की समीक्षा करें ताकि ऑडिट के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई सफाई के बाद अब एनएचएम के अंतिम निर्णय का इंतजार है। यदि विभाग सीएमएचओ के जवाब से संतुष्ट नहीं होता है, तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस घटनाक्रम ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आम जनता का मानना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस जैसी बुनियादी सेवाओं का सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन आने वाले समय में इन सभी 13 गाड़ियों को पूरी क्षमता के साथ संचालित कर पाता है या नहीं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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