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जयपुर का 300 साल पुराना त्रिपोलिया गेट अब नए शाही रंग-रूप में, राजपरिवार ने करवाया संरक्षण

जयपुर की ऐतिहासिक पहचान और राजसी विरासत के प्रतीक करीब 300 वर्ष पुराने त्रिपोलिया गेट को नए शाही स्वरूप में सजाया गया है। जयपुर के पूर्व राजपरिवार की ओर से करवाए गए विशेष संरक्षण एवं जीर्णोद्धार (रिनोवेशन) कार्य के तहत इस ऐतिहासिक प्रवेश द्वार पर पारंपरिक राजस्थानी शैली की नई चित्रकारी की गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
जयपुर का 300 साल पुराना त्रिपोलिया गेट अब नए शाही रंग-रूप में, राजपरिवार ने करवाया संरक्षण
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ऐतिहासिक त्रिपोलिया गेट को मिली नई पहचान

गुलाबी नगरी जयपुर की ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार करीब 300 साल पुराने त्रिपोलिया गेट को एक बार फिर से शाही भव्यता प्रदान की गई है। जयपुर के पूर्व राजपरिवार द्वारा संचालित इस संरक्षण परियोजना के तहत गेट पर पारंपरिक राजस्थानी चित्रकारी की गई है, जिससे इसकी सुंदरता और भी निखर कर सामने आई है। यह द्वार न केवल शहर की वास्तुकला का प्रतीक है, बल्कि राजघराने की परंपराओं का भी मुख्य केंद्र रहा है।

इस जीर्णोद्धार कार्य का निर्देशन पूर्व राजपरिवार के सदस्य सवाई पद्मनाभ सिंह की देखरेख में किया गया है। संरक्षण के दौरान गेट की मूल स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक बनावट को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। कलाकारों ने पारंपरिक तकनीकों और रंगों का उपयोग करते हुए दीवारों पर हाथ से बारीक चित्रकारी की है, जिससे यह प्रवेश द्वार अब पहले से कहीं अधिक आकर्षक दिखाई दे रहा है।

उदयपोल की तर्ज पर हुई कलाकारी

त्रिपोलिया गेट की नई सजावट में सिटी पैलेस के प्रसिद्ध 'उदयपोल' (जिसे आतिश पोल भी कहा जाता है) की थीम को आधार बनाया गया है। उदयपोल की भव्य राजस्थानी चित्रकारी, पुष्प आकृतियों और पारंपरिक रंग संयोजन को त्रिपोलिया गेट पर भी बखूबी उकेरा गया है। लाल, हरे, नीले और सुनहरे रंगों का संतुलित प्रयोग इसे एक विशिष्ट शाही स्वरूप प्रदान करता है, जो राजपूत और मुगल वास्तुकला के अनूठे संगम को दर्शाता है।

गेट की मेहराबों पर बेल-बूटों और ज्यामितीय डिजाइनों का काम बेहद बारीकी से किया गया है। इसके ऊपरी हिस्से में राजसी शैली के बॉर्डर और पेंटिंग जयपुर की समृद्ध कला परंपरा को जीवंत करते हैं। यह कार्य न केवल गेट की चमक लौटाने के लिए किया गया है, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शाही परंपराओं का प्रतीक और भविष्य की तैयारी

त्रिपोलिया गेट का महत्व केवल इसकी वास्तुकला तक सीमित नहीं है। ऐतिहासिक रूप से यह द्वार शाही परिवार के लिए आरक्षित रहा है और आज भी सामान्य दिनों में आम लोगों का प्रवेश यहां से नहीं होता है। यह द्वार विशेष राजकीय अवसरों, त्योहारों और शाही मेहमानों के आगमन के लिए ही उपयोग में लाया जाता है। आगामी 15 और 16 अगस्त को तीज की शाही सवारी इसी ऐतिहासिक मार्ग से होकर गुजरेगी।

इस गेट का इतिहास जयपुर के महत्वपूर्ण जुलूसों से जुड़ा है। रियासत काल में सभी प्रमुख शाही जुलूस यहीं से निकलते थे। इसके अलावा, महाराजा मान सिंह द्वितीय के काल में गेट की शोभा बढ़ाने के लिए सजावटी बॉक्स बनवाए गए थे, और ब्रिगेडियर महाराजा भवानी सिंह ने गेट के बाहर दो ऐतिहासिक तोपें स्थापित करवाई थीं। गेट के भीतर प्रवेश करते ही मुबारक महल दिखाई देता है, जो अब शाही परिधानों के संग्रहालय के रूप में प्रसिद्ध है।

पिछले कई महीनों से बंद रहे इस गेट को अब पर्यटन विभाग की ओर से विधिवत रूप से शुरू करने की तैयारी है। जयपुर का प्रसिद्ध 'त्रिपोलिया बाजार' भी इसी गेट के नाम पर पड़ा है, जो सिटी पैलेस और जंतर-मंतर के मुख्य मार्ग के पास स्थित है। इस संरक्षण कार्य के बाद, यह ऐतिहासिक द्वार एक बार फिर पर्यटकों और शहरवासियों के लिए जयपुर की समृद्ध संस्कृति का एक प्रमुख आकर्षण बन गया है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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