जयपुर में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त: 22 गोदाम से बी-2 बाइपास तक 310 अवैध कब्जे हटाने के आदेश
हाईकोर्ट ने जयपुर में 22 गोदाम रेलवे लाइन से लेकर बी-2 बाइपास तक करीब 310 चिन्हिंत अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने यह आदेश सीताराम देवंदा व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।

मुश्ताक अहमद खान
Editor In Chief

जयपुर में शहर की प्रमुख सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने 22 गोदाम रेलवे लाइन से लेकर बी-2 बाइपास तक के दायरे में चिह्नित किए गए करीब 310 अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने सीताराम देवंदा व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया है।
जेडीए को चार महीने का समय और नोटिस की अनिवार्यता
हाईकोर्ट ने जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अतिक्रमण हटाने की यह पूरी प्रक्रिया चार महीने के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रभावित लोगों को 15 दिन का नोटिस देने और उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए सुनवाई का अवसर प्रदान करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई के दौरान जेडीए सचिव को 25 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी।
सुनवाई के दौरान जेडीए ने अदालत में एक शपथ पत्र भी पेश किया, जिसमें सड़क की चौड़ाई के मानकों को स्पष्ट किया गया है। जेडीए की 62वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, इस मार्ग को तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है। 22 गोदाम रेलवे स्टेशन से महेश नगर फाटक तक सड़क की चौड़ाई 40 फीट, महेश नगर फाटक से गोपालपुरा बाइपास तक 60 फीट और गोपालपुरा बाइपास से बी-2 बाइपास तक 80 फीट निर्धारित की गई है।
रेलवे के अतिक्रमण पर भी कोर्ट का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि सड़क के कुछ हिस्सों पर रेलवे अधिकारियों द्वारा भी अतिक्रमण किया गया है। इस गंभीर बिंदु पर संज्ञान लेते हुए खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण चाहे किसी निजी व्यक्ति ने किया हो या किसी वैधानिक प्राधिकरण ने, सभी को हटाया जाना अनिवार्य है। कोर्ट ने किसी भी प्रकार के भेदभाव के बिना अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश दिए हैं।
यह क्षेत्र जयपुर के व्यस्ततम इलाकों में से एक है, जहां अतिक्रमण के कारण अक्सर यातायात बाधित रहता है। स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों के लिए यह सड़क एक महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन अवैध कब्जों के कारण इसकी उपयोगिता सीमित हो गई थी। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सड़क का चौड़ीकरण और सुगम आवागमन सुनिश्चित हो सकेगा।
प्रशासन की जिम्मेदारी और भविष्य की कार्रवाई
जेडीए के लिए अब यह चुनौती है कि वह आगामी चार महीनों में इन 310 चिह्नित अतिक्रमणों को कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कैसे हटाता है। 15 दिन का नोटिस देने की अनिवार्यता के कारण प्रशासन को व्यवस्थित तरीके से काम करना होगा ताकि कानूनी अड़चनें न आएं। 25 नवंबर की तारीख जेडीए के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस दिन उन्हें अदालत को यह बताना होगा कि अब तक कितनी कार्रवाई पूरी की गई है।
इस आदेश ने शहर में अवैध निर्माण करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश दिया है। कोर्ट की सख्ती से यह स्पष्ट है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अब सभी की निगाहें जेडीए की आगामी कार्रवाई और 25 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

Editor In Chief
मुश्ताक अहमद खान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!