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जयपुर अमायरा केस: 8 महीने बाद चार्जशीट में बड़ा खुलासा, स्कूल की लापरवाही और सबूत मिटाने की कोशिश आई सामने

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल के चर्चित अमायरा डेथ केस में 8 महीने बाद पुलिस ने चार्जशीट पेश की है। इसमें कई अहम खुलासे हुए हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

19 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
जयपुर अमायरा केस: 8 महीने बाद चार्जशीट में बड़ा खुलासा, स्कूल की लापरवाही और सबूत मिटाने की कोशिश आई सामने
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आठ महीने की जांच के बाद चार्जशीट में गंभीर खुलासे

जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में हुई अमायरा की मौत के मामले में पुलिस ने घटना के आठ महीने बाद चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में स्कूल की क्लास टीचर, प्रिंसिपल और संस्थापक को आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले भी अमायरा बुलिंग का शिकार हुई थी और उसने कई बार अपनी क्लास टीचर से शिकायत की थी, लेकिन उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, 1 नवंबर 2025 को हुई इस घटना के सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिख रहा है कि अमायरा मानसिक तनाव में थी और उसने पांच बार अपनी शिक्षिका पुनिता शर्मा से संपर्क किया था। इसके बावजूद शिक्षिका ने उसकी बात नहीं सुनी, जिसे पुलिस ने 'ड्यूटी ऑफ केयर' यानी देखभाल के कर्तव्य में गंभीर लापरवाही माना है।

सबूत मिटाने और संवेदनहीनता के आरोप

चार्जशीट में सबसे चौंकाने वाला खुलासा सबूतों के साथ छेड़छाड़ को लेकर है। पुलिस का आरोप है कि अमायरा के चौथी मंजिल से गिरने के बाद स्कूल प्रशासन ने घटनास्थल को पानी से धोकर खून के धब्बे साफ कर दिए थे। इतना ही नहीं, बच्ची का बैग भी करीब 10 दिनों तक स्कूल प्रबंधन की कस्टडी में रहा और पुलिस को समय पर नहीं सौंपा गया।

जांच अधिकारी ने यह भी बताया कि जब एक अन्य छात्रा ने टीचर को अमायरा के गिरने की सूचना दी, तब भी शिक्षिका ने कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी और क्लास में ही बैठी रही। इस संवेदनहीनता के कारण शिक्षिका के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

अमायरा के पिता विजय मीणा ने पुलिस की चार्जशीट पर असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि स्कूल संस्थापक सौरभ मोदी और प्रिंसिपल इंदू दूबे पर केवल हल्की धाराएं लगाई गई हैं, जबकि उन पर भी जेजे एक्ट की धारा 75 लागू होनी चाहिए थी। परिजनों का कहना है कि स्कूल में सुरक्षा मानकों का भारी उल्लंघन हुआ है और सीबीएसई की गाइडलाइन के अनुसार सीसीटीवी में वॉयस रिकॉर्डिंग तक की सुविधा नहीं थी।

पिता ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने घटना के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग की टीमों को घंटों तक परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया था। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की राह

अदालत में चार्जशीट पेश होने के बाद अब मामले में आरोप तय करने पर सुनवाई होनी है। हालांकि, अब तक हुई सुनवाइयों में आरोपी पक्ष की अनुपस्थिति के कारण प्रक्रिया में देरी हुई है। कानूनी जानकारों के अनुसार, अब अदालत चार्जशीट का संज्ञान लेगी और इसके बाद अभियोजन पक्ष अपने सबूत व गवाह पेश करेगा।

यह मामला स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षकों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। पुलिस की जांच में सामने आई 'सुपरवाइजरी नेग्लीजेंसी' यह दर्शाती है कि स्कूल परिसर में एंटी-बुलिंग कमेटी और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने में बड़ी चूक हुई थी, जिसका खामियाजा एक मासूम को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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