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इंदौर में मानसून की सुस्ती: 10 साल में सबसे कम बारिश, जलाशयों का जलस्तर घटा

मानसून का आधा सफर बीत जाने के बाद भी इंदौर शहर अच्छी बारिश का इंतजार कर रहा है। मानसून शुरू होने के दो महीने में शहर में केवल 15 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले 10 साल में इस अवधि की सबसे कम बारिश है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
इंदौर में मानसून की सुस्ती: 10 साल में सबसे कम बारिश, जलाशयों का जलस्तर घटा
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इंदौर में मानसून की बेरुखी

इंदौर में मानसून का आधा सफर बीत जाने के बावजूद शहर अभी भी अच्छी बारिश के लिए तरस रहा है। मानसून के आगमन के बाद बीते दो महीनों में शहर में केवल 15 इंच बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में इस अवधि के दौरान हुई यह सबसे कम बारिश है। जुलाई के पहले सप्ताह के बाद से शहर में कोई भी मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं हो पाया है, जिससे बारिश की कमी लगातार बनी हुई है।

शहर के विभिन्न हिस्सों में बारिश का वितरण भी असमान रहा है। एयरपोर्ट, राजबाड़ा और रीगल जैसे क्षेत्रों में कुछ बेहतर बारिश दर्ज की गई, जबकि शहर के पूर्वी हिस्से में यह आंकड़ा महज 13 इंच तक ही सीमित रहा। लंबे समय तक बारिश न होने के कारण शहर का जनजीवन और कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

जलाशयों पर गहराया संकट

कम बारिश का सीधा असर शहर के प्रमुख जलाशयों पर पड़ रहा है। 34 फीट की क्षमता वाला बड़ा बिलावली तालाब अब भी काफी हद तक खाली है, जबकि छोटा बिलावली तालाब पूरी तरह सूख चुका है। इसके अलावा, शहर को जलापूर्ति करने वाले यशवंत सागर का जलस्तर भी चिंताजनक रूप से गिर गया है। 19 फीट क्षमता वाले इस जलाशय में अब केवल 12 फीट पानी ही बचा है, जिससे भविष्य में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है।

खेती पर भी इसका बुरा असर देखने को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त पानी न मिलने से सोयाबीन, मक्का, धान और उड़द जैसी खरीफ फसलों की बढ़वार बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जुलाई के दौरान बने चार बड़े बारिश के सिस्टम इंदौर के बजाय बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी की ओर रुख कर गए, जिससे इंदौर को राहत नहीं मिल सकी।

पूरे मध्य प्रदेश में बारिश की कमी

केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मानसून की स्थिति सामान्य से कमजोर बनी हुई है। राज्य में अब तक औसतन 16.03 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक 19.50 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस प्रकार, प्रदेश में अब तक करीब 19 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, देवास जैसे कुछ चुनिंदा जिले ऐसे भी हैं जहां सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अगस्त के पहले सप्ताह में भी बारिश का आंकड़ा बहुत कम रहा है। 1 अगस्त से 5 अगस्त के बीच शहर में नाममात्र की बारिश दर्ज की गई है, जिससे कुल सीजनल बारिश का आंकड़ा 15 इंच पर ही अटका हुआ है।

अगले कुछ दिनों में राहत की उम्मीद

मौसम केंद्र (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए कुछ उम्मीद जताई है। विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों में प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश की संभावना है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से मौसम में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक का कहना है कि यदि यह मौसमी सिस्टम मजबूत रहता है, तो प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे बारिश के आंकड़ों में सुधार की संभावना है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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