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इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत से खिलवाड़: पीने के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया

मोहम्मद नवेद

मोहम्मद नवेद

एडिटर

22 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें
इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेहत से खिलवाड़: पीने के पानी में मिले खतरनाक बैक्टीरिया
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इंदौर के छह सरकारी अस्पतालों में पेयजल में मिले घातक कीटाणु

इंदौर के सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की सेहत के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला सामने आया है। एक हालिया हेल्थ ऑडिट में यह खुलासा हुआ है कि शहर के छह प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पीने के लिए उपलब्ध पानी में मानव और जानवरों के मल में पाए जाने वाले खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद हैं। यह स्थिति मरीजों के स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक है, क्योंकि अस्पताल में पहले से ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भर्ती होते हैं।

जांच के दौरान एमवाय अस्पताल, सुपर स्पेशिएलिटी, पीसी सेठी और चाचा नेहरू अस्पताल के पानी के नमूनों में ई-कोलाई और टोटल कॉलिफॉर्म की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, मानसिक चिकित्सालय के पानी में भी टोटल कॉलिफॉर्म पाया गया है, जबकि जिला अस्पताल के पेयजल में अन्य रोगजनक कीटाणु मिले हैं। केवल एमटीएच, बाणगंगा और एमआरटीबी अस्पताल के पानी को ही पीने योग्य पाया गया है।

मरीजों के लिए संक्रमण का बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई बैक्टीरिया का पानी में मिलना मल जनित प्रदूषण का सीधा संकेत है। यह बैक्टीरिया इंसानों और जानवरों की आंतों में पनपता है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर, जहां नवजात शिशु, आईसीयू में भर्ती मरीज और हाल ही में सर्जरी कराने वाले लोग मौजूद होते हैं, वहां इस तरह का दूषित पानी गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है। कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया का समूह भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और यह मरीजों की रिकवरी में बाधा डाल सकता है।

अस्पतालों में पेयजल की व्यवस्था को लेकर भी भारी लापरवाही सामने आई है। पीसी सेठी और एमवाय अस्पताल में आरओ प्लांट की जिम्मेदारी एक एनजीओ के पास है, लेकिन वहां के पानी में भी बैक्टीरिया पाए गए हैं। पीसी सेठी अस्पताल में वाटर कूलर के आसपास गंदगी का अंबार है, जबकि एमवाय अस्पताल में कैजुअल्टी के पास लगे वाटर कूलर अक्सर बंद रहते हैं। मानसिक चिकित्सालय में आरओ का पानी सीधे मटकों में भरकर दिया जा रहा है, जो संक्रमण के खतरे को और बढ़ा देता है।

अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल

सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में मरीजों को पानी के लिए सातवीं मंजिल तक जाना पड़ता है, जहां का आरओ अक्सर खराब रहता है। कैंटीन के पानी में भी बैक्टीरिया पाए गए हैं। वहीं, नए जिला अस्पताल में मरीजों के लिए पेयजल की कोई स्थायी व्यवस्था ही नहीं है, जहां एक सामाजिक संस्था के भरोसे पानी वितरण होता है। बाणगंगा अस्पताल में हालांकि पानी में कीटाणु नहीं मिले, लेकिन वहां भी आरओ प्लांट के बंद रहने और आसपास गंदगी होने की समस्या बनी हुई है।

इस पूरे मामले पर एमजीएम मेडिकल कॉलेज के एचआईसीसी नोडल अधिकारी डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव का कहना है कि अस्पतालों में हॉस्पिटल इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी की नियमित बैठकें होती हैं और पेयजल के नमूनों की जांच कराई जाती है। उन्होंने दावा किया कि जहां भी कमी पाई जाती है, वहां अस्पताल अधीक्षक को सूचित किया जाता है। गौरतलब है कि इन समितियों के अध्यक्ष स्वयं अस्पताल के अधीक्षक ही होते हैं, बावजूद इसके पेयजल की यह स्थिति व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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